SC/ST Constable

VIDEO: उत्तर प्रदेश में SC/ST Constable के शोषण की कहानी: इटावा पुलिस पर गंभीर आरोप

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हाइलाइट्स

  • SC/ST Constable गुजन पाल ने रोते हुए कहा- “मेरी जाति का मजाक उड़ाया जा रहा है”
  • चौकी इंचार्ज रजनी सिंह पर जातिसूचक शब्द कहने और सस्पेंड करने की धमकी देने का आरोप
  • घटना इटावा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र की रूरा चौकी की
  • मामला सामने आने के बाद भी उच्च अधिकारी मौन, कोई कार्रवाई नहीं
  • योगी सरकार में दलित उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, सिस्टम पर सवाल

SC/ST Constable को मिला अपमान का जवाब: दर्दनाक है गुजन पाल की आपबीती

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की दुहाई देने वाली योगी सरकार की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इटावा जिले के SC/ST Constable गुजन पाल ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उन्हें लगातार मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है। चौकी प्रभारी रजनी सिंह पर उन्होंने जातिसूचक शब्द कहने और बार-बार नौकरी से सस्पेंड कराने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

यह घटना सिर्फ एक कांस्टेबल की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाती है, जहां एक SC/ST Constable को अपने आत्म-सम्मान के लिए भी लड़ना पड़ता है।

रो-रो कर सुनाई गुजन पाल ने अपनी व्यथा

 “मुझे मेरी जाति के कारण टारगेट किया जा रहा है” – गुजन पाल

इटावा पुलिस लाइन में तैनात SC/ST Constable गुजन पाल ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में फूट-फूट कर रोते हुए कहा,

“मैंने कोई गलती नहीं की है, फिर भी चौकी इंचार्ज रजनी सिंह मुझे बार-बार जातिसूचक गालियां देती हैं। कहती हैं कि तेरी औकात क्या है, तुझे नौकरी से निकलवाऊंगी।”

गुजन पाल की यह वीडियो देखकर पूरे प्रदेश में पुलिस तंत्र की संवेदनहीनता पर सवाल उठ रहे हैं।

जातिवाद का ज़हर – क्या SC/ST Constable को नहीं है सम्मान से जीने का हक?

संविधान की धज्जियाँ उड़ाता सिस्टम

संविधान के अनुच्छेद 15 और 17 के तहत जातिगत भेदभाव पर सख्त रोक है, लेकिन जब एक SC/ST Constable को ही जातिसूचक शब्दों का सामना करना पड़े और उसे सुरक्षा की जगह उत्पीड़न मिले, तब यह साफ़ हो जाता है कि जमीनी हकीकत कितनी भयावह है।

दलित अधिकार कार्यकर्ताओं का आक्रोश

घटना के बाद दलित संगठनों ने जमकर विरोध जताया। बहुजन समाज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र गौतम ने कहा,

“अगर एक वर्दीधारी SC/ST Constable सुरक्षित नहीं है, तो आम दलितों की हालत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। यह सिर्फ उत्पीड़न नहीं, बल्कि संविधान पर हमला है।”

इटावा पुलिस प्रशासन क्यों है मौन?

SP ऑफिस से नहीं आया कोई जवाब

जब मीडिया ने इस मामले पर इटावा के पुलिस अधीक्षक से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। यह चुप्पी कहीं न कहीं आरोपों की पुष्टि करती प्रतीत होती है।

कार्रवाई की बजाय रिपोर्ट छुपाने में जुटा प्रशासन?

सूत्रों के अनुसार, इटावा पुलिस अब इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। शिकायत दर्ज करने के बजाय गुजन पाल को ही “अनुशासनहीन” ठहराने की कोशिश की जा रही है।

SC/ST Constable के मनोबल पर असर

इस तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार का सीधा असर SC/ST Constable के मनोबल पर पड़ता है। जब पुलिस विभाग जैसे संगठित संस्थान में जातिगत भेदभाव होगा, तो ये न केवल कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि समाज में एक खतरनाक संदेश भी देता है।

योगी सरकार की दलित नीति पर सवाल

उत्तर प्रदेश सरकार दावा करती है कि वह दलितों और पिछड़े वर्गों के हक की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अगर सरकार वाकई में गंभीर है तो ऐसे मामलों में तत्काल और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

क्या कहता है कानून?

भारतीय दंड संहिता की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत जातिसूचक शब्द कहना, धमकी देना और उत्पीड़न करना दंडनीय अपराध है। ऐसे में चौकी इंचार्ज पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

 आगे क्या?

सरकार को चाहिए कि वह:

  • मामले की निष्पक्ष जांच कराए
  • SC/ST Constable गुजन पाल की सुरक्षा सुनिश्चित करे
  • आरोपी अधिकारी को तत्काल निलंबित किया जाए
  • पुलिस विभाग में जातिगत प्रशिक्षण (Caste Sensitization) अनिवार्य किया जाए

यह घटना दर्शाती है कि आज भी हमारी व्यवस्था में जातिवाद गहराई से जड़ें जमाए हुए है। जब एक SC/ST Constable को ही इज्जत नहीं मिलती, तो यह पूरे सिस्टम के लिए खतरे की घंटी है। लोकतंत्र में जाति के आधार पर भेदभाव करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि नैतिक रूप से भी निंदनीय है।

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