Mahashtami के दिन माता भगवती ने महागौरी का अवतार धारण किया था। नवरात्रि में इस व्रत का पूजन आठवें दिन किया जाता है। इस अवतार में मां भगवती के इस गौरव की उपमा संघ चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। 
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः | महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ||
शास्त्रों के अनुसार इनकी आयु 8 वर्ष की मानी गई है। इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण भी श्वेत है। ऐसा माना जाता है कि माता महागौरी ने देवी पार्वती रूप में भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। एक बार भगवान भोलेनाथ ने पार्वती जी को देखकर कुछ कह देते हैं। जिससे देवी के मन को  आहत होता है और पार्वती जी तपस्या में लीन हो जाती है। 

Mahashtami: महाष्टमी के अवसर पर समस्त देशवासियों को प्रधानमंत्री मोदी ने दी शुभकामनाएं

किस प्रकार वर्षों तक कठोर तपस्या करने पर जब पार्वती नहीं आती तो पार्वती को खोजते भगवान शिव उनके पास पहुंचते हैं। वहां पहुंचे तो वहां पार्वती को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं। पार्वती जी का रंग अत्यंत पूर्ण होता है और कुंद के फूल के समान धवल दिखाई पड़ती है। 

उनके वस्त्र आभूषण से प्रसन्न होकर देवी और गौर वर्ण का वरदान देते हैं। इस अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए लिखा है कि Mahashtami की आप सभी को ढेरों शुभकामनाएं। नवरात्रि के इस पावन दिवस पर मां महागौरी के पूजन का विधान है। उनके आशीर्वाद से हर किसी का जीवन रोशन हो माता महागौरी की एक स्तुति।

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