Latjira एक खरपतवार है किंतु औषधीय गुणों से भरपूर है। इसलिए इसे खरपतवार कम औषधीय पौधा ज्यादा माना जाता है। Latjira के माध्यम से सैकड़ों बीमारियों का उपचार किया जा सकता है। इसका वर्णन आज से नहीं सैकड़ों बरसों से होता आ रहा है। यह कई बीमारियों के लिए वरदान के रूप में साबित हुआ है। 
Latjira भारत के लगभग सभी हिस्सों में आसानी से मिल जाता है। आयुर्वेद की भाषा में इसे अपामार्ग कहा जाता है। कहीं कहीं इसे चिरचिटा इत्यादि के नाम से भी बुलाते हैं। यह अपने औषधीय गुणों के कारण जाना जाता है। इससे सैकड़ों बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। 
यह बहुत ही आसानी से उपलब्ध हो जाने वाला औषधि पौधा है। जो बिना किसी खर्च के हर जगह मिल जाता है। इसका उपयोग आयुर्वेद में भारी मात्रा में किया जाता है। आज मैं Latjira के कुछ उपचारों के बारे में बताने जा रहा हूं। जो बहुत ही लोकप्रिय हैं।

Latjira से बीमारियों का आसान उपचार 

बवासीर के लिए
बवासीर बहुत ही एक बड़ी समस्या है। इसके द्वारा इंसान को बहुत ही ज्यादा पीड़ा होती है। यह दो प्रकार की खूनी और बादी होती है। Latjira से इसका उपचार करने के लिए Latjira की ताजा जड़ों को खोद कर उन्हें पीस लेना चाहिए और उसके रस को निकालकर लगातार सेवन करने से दोनों तरह की बवासीर खत्म हो जाती है।
दांतो के लिए
दांतों में पायरिया या अन्य कोई बीमारी है तो Latjira के तने की दातुन बनाकर नियमित रूप से करने पर कुछ ही दिनों में दांतो के सभी रोग पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं।
सांप और बिच्छू के जहर के लिए
सांप और बिच्छू का जहर बहुत ही घातक होता है। इसीलिए इसका इलाज सिर्फ अस्पताल में ही कराना चाहिए किंतु प्राथमिक उपचार के रूप में लटजीरा का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए 100 ग्राम सरसों के तेल में लटजीरा के पौधे को उखाड़ कर उसका रस निकालने। इसके बाद तेल को आग पर रखकर गर्म करना शुरू कर दें। जब तेल पूरी तरह से खौलने लगे तो उसमें लटजीरा का रस डाल दें और उससे जो भाप निकले। उससे व्यक्ति के उस भाग की सिकाई करें जहां पर सांप या बिच्छू ने काटा है। इससे तत्काल आराम मिलता है।
नोट-उपरोक्त नुस्खों को उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर का परामर्श अवश्य ले लें।
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