हाइलाइट्स:
- Abhishek Prakash के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT गठित
- सौर ऊर्जा प्लांट के नाम पर कारोबारी से रिश्वत मांगने का मामला
- SIT करेगी बिचौलिए निकांत जैन की कॉल डिटेल और लेन-देन की जांच
- एफआईआर में सामने आए अफसरों की पहचान भी करेगी SIT
- वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर जांच को मिले निर्देश
Abhishek Prakash के खिलाफ शुरू हुई SIT जांच
उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में हड़कंप मचा देने वाले Abhishek Prakash रिश्वत प्रकरण में अब एक और बड़ा कदम उठाया गया है। गोमतीनगर थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जो मामले की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाएगी।
इस प्रकरण में इन्वेस्ट यूपी के तत्कालीन CEO और निलंबित IAS अधिकारी Abhishek Prakash पर आरोप है कि उन्होंने सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के इच्छुक कारोबारी से अपने करीबी बिचौलिए निकांत जैन के माध्यम से 5% कमीशन की मांग की थी।
SIT की संरचना और जिम्मेदारियां
तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन
SIT की कमान बाराबंकी के एएसपी विकास चन्द्र त्रिपाठी को सौंपी गई है। टीम में एसीपी गोमतीनगर विनय द्विवेदी और थाना गोमतीनगर के इंस्पेक्टर आलोक राय को भी शामिल किया गया है। इस टीम को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह:
- Abhishek Prakash और निकांत जैन के बीच की कड़ी को स्पष्ट करे
- इलेक्ट्रॉनिक सबूत, कॉल डिटेल और लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाले
- शिकायतकर्ता उद्यमी विश्वजीत दत्ता के बयान को प्राथमिकता से दर्ज करे
- इस पूरे प्रकरण में अन्य संभावित शामिल व्यक्तियों की पहचान करे
कॉल डिटेल्स और धमकी की जांच
जांच टीम निकांत जैन के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगालने में जुट गई है। इसके अलावा उद्यमी विश्वजीत दत्ता से विस्तृत पूछताछ की जाएगी। एफआईआर में पहले से ही निकांत पर धमकी देने की धाराएं जुड़ चुकी हैं।
पुलिस को कोर्ट की तरफ से यह स्पष्ट करने का निर्देश भी मिला है कि शिकायतकर्ता ने आखिर इन्वेस्ट यूपी के किस अधिकारी का नाम लिया था। इसलिए SIT को यह भी पता लगाना है कि रिश्वत की मांग किसके कहने पर की गई थी और क्या Abhishek Prakash ने सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इसमें भूमिका निभाई थी।
Abhishek Prakash पर पहले से जारी हैं कई आरोप
डिफेंस जमीन घोटाले में भी फंसे हैं Abhishek Prakash
इस पूरे घटनाक्रम के बाद Abhishek Prakash को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया है। वहीं इन्वेस्ट यूपी के नए प्रभारी के रूप में ACEO प्रथमेश कुमार को सीईओ का प्रभार दिया गया है।
यह पहला मामला नहीं है जिसमें Abhishek Prakash का नाम सामने आया है। इससे पहले भी उन पर लखनऊ में डिफेंस जमीन आवंटन को लेकर कथित गड़बड़ियों के आरोप लगे थे। अब उन मामलों में भी दोबारा जांच की शुरुआत की जा रही है।
उद्यमी ने CM योगी तक पहुंचाई थी शिकायत
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब विश्वजीत दत्ता नामक उद्यमी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजी कि उनसे सौर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया में 5% कमीशन मांगा जा रहा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच STF को सौंप दी। STF की शुरुआती जांच में आरोपों को सही पाया गया और उसी के आधार पर निकांत जैन को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि रिश्वतखोरी की यह कोशिश केवल एक व्यक्ति की नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जिसमें Abhishek Prakash की भूमिका संदिग्ध है।
SIT करेगी वैज्ञानिक जांच
SIT को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल बयानों पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों पर भी भरोसा करें। कॉल डिटेल्स, व्हाट्सऐप चैट्स, ईमेल्स और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री की फोरेंसिक जांच की जाएगी।
निकांत जैन के परिवार से भी होगी पूछताछ
SIT ने यह भी तय किया है कि निकांत जैन के परिजनों के भी बयान दर्ज किए जाएंगे ताकि यह समझा जा सके कि रिश्वत की मांग के पीछे कितनी गहराई और किसका दबाव था।
भ्रष्टाचार के खिलाफ यूपी सरकार का सख्त रुख
इस पूरे मामले में Abhishek Prakash का नाम बार-बार सामने आना यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी के अंदर किस हद तक भ्रष्टाचार जड़ें जमा चुका है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर त्वरित और सख्त कार्रवाई कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में यह तय करेगी कि Abhishek Prakash को केवल निलंबन तक सीमित रखा जाएगा या उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही भी शुरू की जाएगी।