Drip Irrigation, सिंचाई की एक ऐसी विधि है। जिसके द्वारा कम से कम पानी खर्च करके पौधों की सिंचाई की जाती है। इस सिंचाई से पौधों को सीधा लाभ मिलता है। क्योंकि पानी की बर्बादी बिल्कुल नहीं होती है। ऐसा माना जाता है की टपक सिंचाई विधि से लगभग 80 से 90% पानी को बचाया जा सकता है। 
यह विधि विकसित देशों में बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय है और इसका प्रयोग अमेरिका में भारी मात्रा में किया जाता है। हालांकि भारत में भी इस विधि से सिंचाई करने के लिए कई राज्य जाने जाते हैं। आज आपको टपक सिंचाई के बारे में विस्तृत रूप से बताया जाएगा जिससे क्या-क्या लाभ होते हैं। 
Drip Irrigation विधि में पानी को पौधों की जड़ों पर बूंद बूंद करके टपकाया  जाता है।  कार्य के लिए वाल्व, पाइप, नालियों तथा एमिटर का नेटवर्क लगाया जाता है। इसको टपक सिंचाई या फिर बूंद बूंद सिंचाई भी कहा जाता है।
इस विधि को प्रयोग करते समय पौधों को पानी में घोलकर उर्वरक भी दिए जाते हैं। जो सीधे पौधों की जड़ों को प्राप्त होते हैं। इस विधि को तकनीकी भाषा में फर्टिगेशन कहा जाता है। इस विधि का प्रयोग करने से पोषक तत्व ज्यादा मात्रा में जमीन में लीचिंग नहीं कर पाते हैं और उनका वाष्पीकरण भी नहीं हो पाता है। जिससे सीधा फायदा पौधों को पहुंचता है।

Drip Irrigation की खासियत

Drip Irrigation पद्धति के इस्तेमाल से मजदूरी और समय में होने वाला खर्च बहुत ही कम हो जाता है। इसके अलावा पौधों को या पेड़ों की जड़ों को पर्याप्त मात्रा में पानी भी मिलता रहता है। जमीन में वायु व जल की मात्रा उचित क्षमता इस पर बनी रहने से फसल की वृद्धि तेजी से और एक समान रूप से होती है। 
जिससे अच्छे परिणाम मिलते हैं। टपक सिंचाई द्वारा फसलों को 2 दिन छोड़कर पानी दिया जाता है। टपक सिंचाई की यही खासियत है। इसमें पानी अत्यंत धीमी गति से दिया जाता है। जिससे पानी सीधे जड़ों को प्राप्त होता है और वास्तपित होकर आसमान में नहीं लौटता है।

Drip Irrigation के फायदे

Drip Irrigation से उत्पादकता और गुणवत्ता में काफी सुधार होता है। इससे पौधे को उतनी मात्रा में ही पानी मिलता है जितना उन्हें आवश्यक होता है। टपक सिंचाई से फल सब्जी और अन्य फसलों के उत्पादन में 20 से 50% तक की बढ़ोतरी होती है। 
Drip Irrigation का सबसे बड़ा फायदा उन क्षेत्रों में होता है जहां पर उबड़ खाबड़ जमीन होती है। ऐसी स्थिति में पानी धीरे-धीरे बूंद बूंद करके दिया जाता है। जमीन धीरे-धीरे सुधर भी जाती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता रहता है। इसके अलावा इसके साथ ही उर्वरकों का उपयोग भी इसके द्वारा किया जाता है जो पौधों को सीधे रूप में प्राप्त होते हैं। 
Drip Irrigation में पानी सीधे जड़ों को मिलता है। इसलिए खरपतवार बहुत कम मात्रा में होते हैं और जमीन में जितने भी पौष्टिकता है वह पूरी तरह से सभी फसल को प्राप्त होती है। इससे सिंचाई करने से कीट और रोगों की क्षमता बहुत कम हो जाती है। जिससे कीटनाशकों पर खर्च होने वाला पैसा भी बचता है। 
टपक सिंचाई पद्धति के उपयोग के कार्य क्षेत्र को छोड़कर बाकी भाग सूखा रहने से निराई गुड़ाई, खुदाई ,कटाई इत्यादि  काम बेहतर ढंग से किए जा सकते हैं। इससे मजदूरी, समय, पैसे तीनों चीजों की भारी बचत होती है।

टपक सिंचाई हेतु आवश्यक चीजें

टपक सिंचाई हेतु कुछ आवश्यक चीजों की आवश्यकता होती है। जिनमें से मुख्य रूप से हेडर असेंबली, फिल्टर रसायन और खाद देने के साधन मेन लाइन, सब मेल लाइन, वोल्व, लेटर लाइन, एमिटर्स इत्यादि की आवश्यकता पड़ती है।
इस विधि से सिंचाई करने से अधिक उत्पादन और खर्चा कम हो जाता है। साथ ही भारी मात्रा में पानी को भी बचाया जाता है। इसलिए इस विधि को सर्वोत्तम माना जाता है। साथ ही ऊसर बंजर भूमि के लिए भी यह विधि बहुत ही उपयोगी है। इस विधि के उपयोग से ऊसर बंजर जमीन को भी ठीक किया जा सकता है।
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