हाइलाइट्स
- ऑर्गनाइज़र के अनुसार Catholic Church land लगभग 7 करोड़ हेक्टेयर है
- वक्फ बिल के पारित होने के बाद RSS ने अब ईसाई संस्थानों की संपत्तियों पर डाला ध्यान
- “सबसे बड़ा गैर-सरकारी भूमि स्वामी” बताई गई कैथोलिक चर्च
- आरएसएस का मानना: सार्वजनिक पारदर्शिता के लिए ज़रूरी है चर्च की भूमि का खुलासा
- राजनीतिक गलियारों में चर्च संपत्ति के स्वामित्व पर फिर शुरू हुई बहस
RSS का नया निशाना: वक्फ के बाद अब Catholic Church land पर नज़र
वक्फ संपत्तियों को लेकर हालिया विधेयक की संसद में सफलतापूर्वक पारित होने के बाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की दृष्टि अब भारत में Catholic Church land यानी कैथोलिक चर्च की भूमि संपत्तियों पर केंद्रित हो गई है। संघ से जुड़ी पत्रिका ऑर्गनाइज़र की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट ने देशभर में बहस छेड़ दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में कैथोलिक चर्च के पास लगभग 7 करोड़ हेक्टेयर भूमि है और इसे “दुनिया का सबसे बड़ा गैर-सरकारी भूमि स्वामी” बताया गया है।
यह बयान न केवल ईसाई समुदाय को चौंकाता है, बल्कि यह केंद्र और राज्य सरकारों को भी सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर किस तरह इतने विशाल पैमाने पर धार्मिक संस्थाएं जमीन की मालिक बन बैठी हैं।
ऑर्गनाइज़र का दावा: Catholic Church land का कोई पारदर्शी रिकॉर्ड नहीं
RSS के विचार मंच माने जाने वाले ऑर्गनाइज़र ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित विश्लेषण में यह कहा है कि देश में Catholic Church land की स्वामित्व व्यवस्था पूरी तरह अपारदर्शी है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि चर्च की संपत्तियों का कोई केंद्रीकृत सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे उनके असली आंकड़े छुपे रह जाते हैं।
रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि ऐसी विशाल संपत्ति का इस्तेमाल किन उद्देश्यों में हो रहा है और इसके वित्तीय लाभों की गणना कैसे की जाती है — यह पूरी तरह से चर्च के अंदरूनी प्रशासन पर निर्भर है, जो किसी सार्वजनिक निगरानी के अंतर्गत नहीं आता।
कैथोलिक चर्च की भूमि: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विस्तार
भारत में कैथोलिक चर्च की उपस्थिति 16वीं शताब्दी से मानी जाती है जब पुर्तगाली गोवा में आए। समय के साथ, चर्च ने मिशनरी गतिविधियों, स्कूल, अस्पताल, और परोपकारी संस्थानों के ज़रिए बड़े पैमाने पर ज़मीन अर्जित की।
आज, Catholic Church land में हजारों स्कूल, कॉलेज, चर्च, मिशन केंद्र, हॉस्पिटल, अनाथालय और सामाजिक संस्थान शामिल हैं। अधिकांश ज़मीन चर्च मिशन ट्रस्ट या डाइसीज़ के नाम पर पंजीकृत है, जो कानूनी रूप से गैर-लाभकारी संस्थाएं होती हैं।
हालांकि, इन संपत्तियों के राजस्व, उपयोग और अधिकारों की स्पष्ट रिपोर्टिंग न होने के कारण पारदर्शिता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
संघ की मांग: सभी धार्मिक संस्थाओं की भूमि सार्वजनिक करें
RSS और उसके सहयोगी संगठनों की मांग है कि जैसे सरकारी संस्थानों की संपत्तियों का लेखा-जोखा सार्वजनिक होता है, वैसे ही Catholic Church land सहित सभी धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों का एक राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार किया जाए।
वक्फ संपत्तियों के लिए बनाए गए केंद्रीय वक्फ बोर्ड की तर्ज पर चर्च भूमि के लिए भी कोई निगरानी तंत्र विकसित करने की बात की जा रही है। संघ के प्रवक्ता ने कहा है कि “जब सार्वजनिक ज़मीनें धर्म के नाम पर ट्रस्टों को दी जाती हैं, तो उन पर सार्वजनिक नियंत्रण भी होना चाहिए।”
विशेषज्ञों की राय: संवैधानिक अधिकार बनाम सार्वजनिक हित
कई संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा धार्मिक स्वतंत्रता बनाम सार्वजनिक पारदर्शिता से जुड़ा है। संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक संस्थानों को अपने धार्मिक मामलों के संचालन की स्वतंत्रता दी गई है।
हालांकि, जब बात संपत्तियों की हो — विशेष रूप से Catholic Church land जैसी व्यापक ज़मीन की — तो यह केवल धार्मिक अधिकारों का मामला नहीं रह जाता, बल्कि इसमें सार्वजनिक नीति और वित्तीय पारदर्शिता का प्रश्न भी उठता है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: संघ की रणनीति पर सवाल
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने RSS पर आरोप लगाया है कि वह एक समुदाय विशेष को निशाना बना रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि “यह विघटनकारी राजनीति का हिस्सा है। जब सरकार अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी पर फेल हो रही है, तब धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति उठाकर ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।”
हालांकि, भाजपा नेता इसे एक सकारात्मक पहल के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि सभी संस्थाओं को जवाबदेह बनाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए ज़रूरी है, चाहे वह Catholic Church land हो या वक्फ संपत्तियाँ।
क्या चर्च तैयार है जवाबदेही के लिए?
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) की ओर से अब तक इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कुछ वरिष्ठ चर्च अधिकारियों ने निजी तौर पर बताया कि वे किसी भी सार्वजनिक जांच से डरते नहीं हैं।
उनका यह भी कहना है कि Catholic Church land पर देशभर में चल रही संस्थाएं समाज को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और यह भूमि इसी सेवा के लिए है, न कि लाभ कमाने के लिए।
एक नई बहस की शुरुआत
Catholic Church land पर संघ के फोकस ने एक नई बहस को जन्म दिया है — क्या सभी धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति पारदर्शी होनी चाहिए? क्या उनके लिए सरकारी निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए?
जहाँ एक ओर सरकार और संघ पारदर्शिता की दुहाई दे रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे धार्मिक ध्रुवीकरण की रणनीति कह रहा है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह बहस किस दिशा में जाती है और क्या भारत सरकार चर्च संपत्तियों पर कोई नीतिगत कदम उठाती है।