हाइलाइट्स:
- Asma murder Noida केस में आरोपी पति ने खुद थाने में सरेंडर किया
- पत्नी के सिर पर हथौड़े से किए कई वार, तकिये से दम घोंटने की आशंका
- बच्चों ने खून से सनी मां को देख परिजनों को दी सूचना
- अवैध संबंधों के शक को बताया हत्या की वजह
- पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर शुरू की गहन पूछताछ
Asma murder Noida: घरेलू विवाद से शुरू होकर हत्या तक की कहानी
उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर के सेक्टर-15 में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। इस घटना को अब पूरे देश में Asma murder Noida केस के नाम से जाना जा रहा है। आरोपी पति नूरुल्ला हैदर ने अपनी पत्नी, जो पेशे से सिविल इंजीनियर थीं, की हत्या कर दी और फिर खुद पुलिस थाने जाकर अपना जुर्म कबूल कर लिया।
यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों, शक और मानसिक तनाव की भयंकर परिणीति है।
आसमा थी एक सुलझी हुई महिला, इंजीनियर के पद पर थी कार्यरत
आसमा की उम्र 42 वर्ष थी। वह नोएडा सेक्टर-62 की एक प्रतिष्ठित कंस्ट्रक्शन कंपनी में सिविल इंजीनियर के रूप में कार्यरत थीं। Asma murder Noida केस में ये बात सामने आई है कि वह अपने काम में पूरी तरह समर्पित थीं और परिवार की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही थीं।
उनका पति नूरुल्ला भी इंजीनियर था लेकिन पिछले कुछ समय से बेरोजगार था, जिससे उनके बीच मतभेद लगातार बढ़ रहे थे।
20 साल पुराना रिश्ता टूटा संदेह के कारण
आसमा और नूरुल्ला की शादी को 20 साल हो चुके थे। उनके दो बच्चे हैं—एक बेटा समद जो B.Tech कर रहा है और एक बेटी स्कूल में पढ़ती है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से दोनों के बीच काफी तनाव चल रहा था।
Asma murder Noida केस में पुलिस को यह भी पता चला है कि नूरुल्ला को पत्नी पर अवैध संबंधों का शक था, जो लगातार झगड़े का कारण बनता गया। आसमा बार-बार सफाई देती रही, लेकिन नूरुल्ला का शक गहराता गया।
हत्या की सुबह: झगड़ा, समझौता और फिर हत्या
घटना वाली सुबह आसमा ने अपनी बहन को कॉल करके बताया कि पति के साथ फिर झगड़ा हुआ है। बहन और मां ने समझा-बुझाकर दोनों को शांत किया और घर लौट गए। लेकिन आसमा की मां हुरनारा बेगम एहतियातन वहीं रुक गईं।
दोपहर करीब 1 बजे नूरुल्ला घर से बाहर गया। इसी दौरान उसकी बेटी कमरे में गई और देखा कि उसकी मां बिस्तर पर खून से लथपथ पड़ी है। आसमा के चेहरे पर तकिया रखा हुआ था, और दीवारों पर खून के छींटे थे।
बेटी की नजर पड़ी मां पर, रोते हुए दी जानकारी
Asma murder Noida केस में बच्चों की भूमिका भी अत्यंत संवेदनशील रही। बेटी जब कमरे में पहुंची तो मां की स्थिति देखकर घबरा गई। उसने तुरंत नानी और मामा को कॉल किया।
आसमा की मां और बहन जब मौके पर पहुंचीं, तब तक आसमा की सांसें थम चुकी थीं। नूरुल्ला तब तक थाने जा चुका था और अपना गुनाह कबूल कर चुका था।
नूरुल्ला का कबूलनामा: “मैंने पत्नी को मार डाला है”
हत्या के बाद नूरुल्ला सीधे नोएडा के सेक्टर-20 थाने पहुंचा और पुलिस से कहा:
“मैंने अपनी पत्नी को मार दिया है, जाकर देख लो।”
यह सुनते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। Asma murder Noida केस अब गंभीर आपराधिक जांच के अंतर्गत है।
कमरे का दृश्य: दीवारों पर खून, तकिए से दबाया गया चेहरा
पुलिस जब मौके पर पहुंची तो देखा कि कमरे की दीवारों पर खून के छींटे थे। बिस्तर खून से सना हुआ था और आसमा के चेहरे पर तकिया रखा हुआ था। इससे संदेह होता है कि हत्या के समय शोर न मचे, इसलिए उसका मुंह दबाया गया।
Asma murder Noida केस में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत के तरीके की पुष्टि की जाएगी।
मानसिक तनाव और बेरोजगारी भी बन सकते हैं वजह
परिवार और पड़ोसियों के अनुसार, नूरुल्ला पिछले कई महीनों से बेरोजगार था। उसका व्यवहार दिन-प्रतिदिन चिड़चिड़ा होता जा रहा था। वह अक्सर पत्नी पर शक करता और आरोप लगाता।
Asma murder Noida केस में मानसिक अस्थिरता और बेरोजगारी जैसे सामाजिक कारकों की भी जांच की जा रही है।
परिवार ने कहा: “ऐसा कभी नहीं सोचा था”
आसमा के जीजा नदीम ने कहा:
“झगड़े तो हर घर में होते हैं, लेकिन हमें यह अंदाज़ा बिल्कुल नहीं था कि नूरुल्ला इतना बड़ा कदम उठा लेगा। आसमा बहुत शांत और समझदार महिला थी।”
क्या कहती है पुलिस? जांच के मुख्य बिंदु
फिलहाल नोएडा पुलिस Asma murder Noida केस की हर पहलू से जांच कर रही है। जांच के मुख्य बिंदु:
- हत्या का तरीका और हथियार
- आरोपी की मानसिक स्थिति
- अवैध संबंधों का शक
- बच्चों की गवाही और मां का कॉल रिकॉर्ड
अभी भी कई सवाल बाकी हैं
- क्या नूरुल्ला मानसिक रूप से बीमार था?
- क्या हत्या पूर्वनियोजित थी?
- क्या आसमा के किसी तीसरे व्यक्ति से संबंध थे?
- क्या इस हत्या को रोका जा सकता था?
Asma murder Noida एक सामाजिक चेतावनी
Asma murder Noida न केवल एक घरेलू हत्याकांड है, बल्कि यह रिश्तों में भरोसे की कमी और मानसिक तनाव के गंभीर परिणामों की मिसाल भी है। यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि संवाद और काउंसलिंग कितनी ज़रूरी है।