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इन बीमारियों के लिए सदैव दूब घास मानी जाती है रामबाण, आइए जाने

दूब या दुर्वा एक घास है जो जमीन पर पसरती है। हिन्दू संस्कारों एवं कर्मकाण्डों में इसका उपयोग किया जाता है। मारवाडी भाषा में इसे ध्रो कहा जाता हैँ।
शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जो दूब को नहीं जानता होगा। हाँ यह अलग बात है कि हर क्षेत्रों में तथा भाषाओँ में यह अलग अलग नामों से जाना जाता है। हिंदी में इसे दूब, दुबडा, संस्कृत में दुर्वा, सहस्त्रवीर्य, अनंत, भार्गवी, शतपर्वा, शतवल्ली, मराठी में पाढरी दूर्वा, काली दूर्वा, गुजराती में धोलाध्रो, नीलाध्रो, अंग्रेजी में कोचग्रास, क्रिपिंग साइनोडन, बंगाली में नील दुर्वा, सादा दुर्वा आदि नामों से जाना जाता है। इसके आध्यात्मिक महत्वानुसार प्रत्येक पूजा में दूब को अनिवार्य रूप से प्रयोग में लाया जाता है।
जैसा कि आप लोग जानते हैं कि दूब घास आपको आपके घर के बाहर पार्क में आसानी से देखने को मिल जाती है. और बहुत से लोग दूब घास फायदों के बारे में काफी अच्छी तरह से जानते हैं. लेकिन फिर भी बहुत से ऐसे लोग हैं जो इसके फायदों के बारे में अच्छी तरह से नहीं जानते.
इसीलिए आज हम आपको दुर्गा उसके ऐसे बेहतरीन फायदों के बारे में बताएंगे जो आपने अभी तक नहीं सुने होंगे. इसलिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़िए.
दूब घास के बेहतरीन फायदे
1.इस पर सुबह के समय नंगे पैर चलने से नेत्र ज्योति बढती है और अनेक विकार शांत हो जाते है.
2.दूब घास शीतल और पित्त को शांत करने वाली है.
3.दूब घास के रस को हरा रक्त कहा जाता है इसे पीने से एनीमिया ठीक हो जाता है.
4.नकसीर में इसका रस नाक में डालने से लाभ होता है.
5.इस घास के काढ़े से कुल्ला करने से मुँह के छाले मिट जाते है.

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