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बिहार में बढ़ते साइबर क्राइम की घटनाओं के बीच लोगों के लिए राहत भरी खबर, आइए जाने

बिहार में बढ़ते साइबर क्राइम की घटनाओं के बीच लोगों के लिए राहत भरी खबर है. बिहार पुलिस मुख्यालय ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि साइबर क्राइम से जुड़े केस दर्ज कराने के लिए लोगों को इधर से उधर नहीं भटकना पड़ेगा. साइबर क्राइम का मामला सामने आते ही थानेदार एफआईआर दर्ज करेंगे और उनकी कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी. बिहार पुलिस मुख्यालय ने आर्थिक अपराध इकाई यानी इओयू की फीडबैक के आधार पर साइबर अपराध को लेकर जिला पुलिस को आगाह किया है. बिहार के पुलिस महानिदेशक संजीव कुमार सिंघल (Sk Singhal) ने सभी जिलों के एसपी को जारी निर्देश के माध्यम से कहा है कि साइबर क्राइम से जुड़े मामलों में आम लोगों को कोई परेशानी ना हो इस बात का हर हाल में ख्याल रखा जाय.
डीजीपी द्वारा जारी निर्देश में इस बात का भी जिक्र है कि कोरोना के इस दौर में साइबर अपराधियों ने साइबर क्राइम के लिए तरह-तरह की तकनीकों को अपनाया है और इससे निपटना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है. डीजीपी ने कहा है कि एसपी जब मंथली क्राइम मीटिंग करें तब उस पर साइबर क्राइम एंड सोशल मीडिया यूनिट यानी सीसी एमयू के काम की अलग से समीक्षा करें. समीक्षा के बाद संबंधित रिपोर्ट को यूओयू को भेजने का भी निर्देश डीजीपी द्वारा दिया गया है.
दरअसल सीसीएमयू साइबर क्राइम के मामले में हो रही जांच में तकनीकी सहयोग करती है और उसकी इसमें बेहद अहम भूमिका भी मानी जाती रही है. पूरे बिहार में 74 सीसीएमयू स्थापित हैं और इसका इंचार्ज पुलिस इंस्पेक्टर के स्तर के अधिकारी को बनाया जाता है. बिहार पुलिस मुख्यालय के एक अधिकारी ने न्यूज़ 18 को इस बात की जानकारी दी कि अधिकांश जिलों में सीसीएमयू यानी सोशल साइबर क्राइम एंड सोशल मीडिया यूनिट का इंचार्ज ऐसे लोगों को बनाया गया है जिन्हें साइबर क्राइम के बारे में पूरी जानकारी नहीं है.
बताया जा रहा है कि इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी इस यूनिट के इंचार्ज तो बना दिए गए हैं, लेकिन अधिकांश जिलों में ऐसे लोग बनाये गए हैं जो रिटायरमेंट के नजदीक पहुंच गए हैं. यानी कुल मिलाकर SP सीसीएमयू के काम को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. डीजीपी ने कहा है कि सीपीएमयू के अफसरों को आवश्यकतानुसार दोबारा आर्थिक अपराध इकाई यूनिट में ट्रेनिंग भी दिलवाया जा सकता है. गौरतलब है कि करोना कॉल में साइबर अपराधियों ने बिहार में पुलिस के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
आर्थिक अपराध इकाई के ADG नैयर हसनैन खान ने न्यूज 18 से बातचीत करते हुए बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में तकरीबन दो दर्जन साइबर क्राइम के मामले सामने आए जिसमें ईओयू ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर त्वरित कार्रवाई करते हुए 30 से 40 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर इओयू के कर्मी भी उन जिलों में जाकर पुलिस अधिकारियों को ट्रेनिंग देंगे जहां साइबर अपराध की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं.

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