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आईटीसी लिमिटेड ने कहा कि भारत में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर के चलते एफएमसीजी उद्योग के लिए चुनौतियां बढ़ी

आईटीसी लिमिटेड ने कहा कि भारत में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर के चलते एफएमसीजी उद्योग के लिए चुनौतियां बढ़ी हैं और पहली लहर की तुलना में इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में वायरस का प्रकोप अधिक रहने से उद्योग की वृद्धि संभावनाओं पर असर पड़ने की आशंका भी है.
आईटीसी की वर्ष 2020-21 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि वायरस के प्रकोप के कारण भारत में आर्थिक सुधार को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक उपभोक्ता अब बचत पर जोर दे सकते हैं, जिसके चलते खपत में वृद्धि प्रभावित होगी. इसके अलावा ग्रामीण मांग भी प्रभावित हो सकती है.
कंपनी के निदेशकों ने रिपोर्ट में कहा, ‘‘देश में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर की गंभीरता एक महत्वपूर्ण चुनौती है और निकट अवधि में एफएमसीजी उद्योग को सजग रहना होगा.’’
कोरोना लगातार नए-नए रूप में सामने आ रहा है. डेल्टा और डेल्टा प्लस के बाद अब लैम्ब्डा वैरिएंट के केस बढ़ने लगे हैं. दुनिया के 29 देशों में इस वैरिएंट से संक्रमित मरीज मिल चुके हैं. ये आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. मार्च-अप्रैल में इस वैरिएंट से जुड़े केस तेजी से बढ़ने के बाद 14 जून को WHO ने इस वैरिएंट को ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ की कैटेगरी में रखा. WHO का मानना है कि कई देशों में फिर से बढ़ रहे केस लोड के पीछे लैम्ब्डा वैरिएंट ही जिम्मेदार है.
लैम्ब्डा वैरिएंट क्या है?
हर वायरस लंबे समय तक जीवित रहने और खुद को मजबूत बनाने के लिए अपने जीनोम (आम भाषा में कहें तो संरचना) में बदलाव करता रहता है. वायरस की मूल संरचना में होने वाले बदलावों को म्यूटेशन कहते हैं और इन बदलावों के बाद वायरस नए रूप में हमारे सामने आता है, जिसे वैरिएंट कहा जाता है. आसान भाषा में समझें, तो ये वायरस का नया रूप है जिसे लैम्ब्डा (C.37) नाम दिया गया है.

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