Home Lifestyle आखिर क्यों पहला प्यार नहीं भूला पाते लोग, जानिए कारण

आखिर क्यों पहला प्यार नहीं भूला पाते लोग, जानिए कारण

प्यार या प्रेम एक अहसास है। जो दिल से नहीं दिमाग से होता है प् यार अनेक भावनाओं जिनमें अलग अलग विचारो का समावेश होता है!, रवैयों का मिश्रण है जो उनको देखने मिलने की चाह पारस्परिक स्नेह से लेकर खुशी की ओर धीरे धीरे अग्रसर karta है। ये एक मज़बूत आकर्षण और निजी जुड़ाव की भावना जो सब भूलकर उसके साथ जाने को प्रेरित करती है। ये किसी की दया, भावना और स्नेह प्रस्तुत करने का तरीका भी माना जा सकता है। जिसके examples माता और पिता होते है खुद के प्रति, या किसी जानवर के प्रति, या किसी इन्सान के प्रति स्नेहपूर्वक कार्य करने या जताने को प्यार कहा जाता हैं।
1 कच्ची उम्र की स्मृति
आपने कभी ध्यान दिया कि बचपन या तरुणाई में जो बातें, गीत हमें झट पट याद हो जाते थे वो उम्र बढ़ने के बाद उतनी आसानी से नहीं हो पाते। इसका कारण ये है कि कच्ची उम्र में जो स्मृति मस्तिष्क में बनती है वो पूरे जीवन बनी रहती है , जबकि बड़ी उम्र में ऐसा नहीं होता , तब आप बातें और भाव भूलने लगते हैं। पहला प्यार अक्सर कच्ची उम्र में होता है जब हम स्मृतियों को ज़्यादा अच्छी तरह सहेज पाते हैं , यही कारण है कि ये प्यार और इससे जुड़े भाव हमें हमेशा याद रहते हैं।
2 हर पहला अनुभव खास
बात सिर्फ पहले प्यार की करें तो ये सच है कि वो हमेशा याद रहता है क्योंकि पहली बार हुई हर चीज ख़ास होती है। बच्चे का पहला शब्द , पहला कदम, पहला स्कूल, पहली टीचर , पहली नौकरी , पहली सैलरी , पहली कार – ये वो अनुभव हैं जिनका पहली बार होना एक ख़ास अनुभूति करवाता है जो फिर कभी नहीं होती। यही कारण है कि पहला प्यार भी ख़ास हो जाता है क्योंकि वैसी अनुभूतियाँ इससे पहले कभी महसूस नहीं की होती।
3 दुनियादारी और जिम्मेदारी से परे
पहला प्यार जिस अवस्था में होता है तब हम दुनियादारी और जिम्मेदारियों से परे होते हैं। मन में या मस्तिष्क में किसी प्रकार का कोई मतभेद नहीं होता यानी मन और मस्तिष्क दोनों एक ही तरह सोचते और काम करते हैं इसलिए इस वक्त हुई अनुभूतियाँ हम पर ज़्यादा असर करती हैं। ये उम्र भी ऐसी होती है कि हम रोजमर्रा की भाग दौड़ , तनाव और स्वार्थों में अभी तक पड़े ही नहीं होते जिसके कारण हमारी भावनाएं ज़्यादा पवित्र और सच्ची होती हैं। ऐसी भावनाएं मन पर ज़्यादा गहरा प्रभाव छोड़ती हैं बजाय उनके जो तनाव , स्वार्थ और भाग दौड़ से भरे जीवन में बने रिश्तों से उपजती हैं।

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