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द्रोपदी की सुहागरात का रहस्य जान कर रह जाएंगे आप भी हैरान, जानिए इस काले सच के बारे में

महाभारत हिन्दुओं का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है, जो स्मृति के इतिहास वर्ग में आता है। कभी कभी इसे केवल भारत कहा जाता है। यह काव्यग्रंथ भारत का अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ हैं।

महाभारत के बारे में हर हिंदू को पता है. महाभारत में बहुत ही विचित्र कहानियां भरी पड़ी है जिनमें से एक आज मैं आपको बताने जा रहा हूं. यह कहानी है द्रौपदी की. दोस्तों महाभारत में पांचों पांडवों की पत्नी द्रौपदी के बारे में तो आप जानते ही होंगे ? तिरुपति की उत्पत्ति राजा द्रुपद के हवन कुंड से उस वक्त हुई थी जब वह अपने दुश्मन द्रोणाचार्य के कुलपति के लिए पुत्र प्राप्ति का यज्ञ कर रहे थे.
द्रौपदी की उत्पत्ति
राजा द्रुपद के उस हवन कुंड की अग्नि से एक पुत्र धृष्टद्युम्न के साथ द्रोपदी ही पैदा हुई थी. दोस्तों आप लोग यह तो जानते ही होंगे कि राजा द्रुपद ने अपनी पुत्री द्रोपदी के विवाह के लिए स्वयंवर रचा था. जिसमें ब्राह्मण वेश में आए अर्जुन ने स्वयंवर की शर्त को पूरा करके द्रोपदी को अपनी पत्नी बना लिया था.
द्रौपदी का स्वयंवर
दोस्तों जिस समय द्रोपदी का स्वयंवर हुआ था उस समय पांचो पांडव भाई अपनी मां कुंती के साथ सभी से अपनी पहचान छुपाकर ब्राह्मण वेश में रहा करते थे और भिक्षा मांग कर अपनी जीविका चलाते थे. पांचो पांडव भाई जितने भी भिक्षा मांग कर लाते थे वह अपनी मां के सामने रख देते थे. फिर देवी कुंती उस भिक्षा अपने पांचों पुत्रों के बीच बांट दिया करती थी.
द्रौपदी का ग्रह प्रवेश
दोस्तों इसी प्रकार जब अर्जुन और भीम द्रोपदी को लेकर घर आए तो उन्होंने दरवाजे पर खड़े होकर देवी कुंती से कहा कि “देखो मा आज हम यह भिक्षा लेकर आए है”. परंतु घर का काम कर रहे कुंती ने उनकी तरफ देखे बिना ही यह कह दिया की पांचों भाई मिलकर उसका उपभोग करो.
द्रौपदी का बंटवारा
दोस्तों जैसा कि आप जानते ही हैं कुंती के सभी बेटे बड़े ही सत्यवादी थे और अपनी मां के मुंह से निकली हर बात को उनका आदेश मानते थे. इसीलिए अपनी मां के मुंह से निकले इन शब्दों को लेकर सभी भाई चिंतित हो गए. देवी कुंती ने भी जब द्रौपदी को देखा तो वह भी बहुत चिंतित हो गई कि उसने यह क्या कह दिया ?
द्रौपदी की पहली रात
दोस्तों इस प्रकार द्रौपदी को पांचों भाइयों से शादी करनी पड़ी. पहले तो द्रौपदी का विवाह पांडवों के सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर के साथ किया गया और उस रात द्रौपदी ने कक्ष में अपना पत्नी धर्म निभाया. अगले दिन द्रौपदी का विवाह भीम के साथ हुआ और उस रात उसने भीम के साथ अपना पत्नी धर्म निभाया. फिर इसी प्रकार अर्जुन, नकुल तथा सहदेव के साथ द्रोपदी का विवाह हुआ.

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