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देशभर में सोमवार से नई वैक्सीनेशन पॉलिसी लागू होने जा रही, जान लें ये बातें

देशभर में सोमवार से नई वैक्सीनेशन पॉलिसी लागू होने जा रही है. नई नीति में 18 से 44 उम्र वर्ग के लोग सीधे वैक्‍सीनेशन सेंटर पर जाकर वैक्‍सीन लगवा सकते हैं. पहले, 18 से 44 साल के लोगों को वैक्‍सीन लगवाने के लिए कोविन पोर्टल से अपॉइंटमेंट लेने की जरूरत होती थी. नई पॉलिसी के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारों के जरिए 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन लगेगी. अभी केंद्र 45 साल से नीचे के लोगों को वैक्सीन नहीं लगा रही थी. राज्य सरकारें और प्राइवेट अस्पताल लगा रहे थे.
नई पॉलिसी में स्पष्ट कहा गया है कि कोरोना वैक्सीनेशन के लिए निजी अस्पताल अब मनमानी कीमत नहीं वसूल पाएंगे. केंद्र ने निजी अस्पतालों में वैक्सीन की अधिकतम रेट तय कर दिया है. 780 कोविशील्ड की एक डोज के लिए देनी होगी. जबकि स्पुतनिक के लिए 1145 और कोवैक्सीन के लिए 1410 रुपए निजी अस्पताल ले सकेंगे.
वैक्सीन सप्लाई के लिए तय किया पैमाना
वैक्सीनेशन पॉलिसी में बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने टीके की सप्लाई के लिए भी कुछ पैमाने तय किए हैं, जिसमें राज्य की आबादी, कोरोना संक्रमण के फैलाव की स्थिति, वैक्सीनेशन प्रोग्राम की प्रोग्रेस और वैक्सीन की बर्बादी का ध्यान रखा जाएगा. 75 फीसदी टीका वैक्सीन निर्माता कंपनियों से केंद्र खरीदेगी और बाकी 25 फीसदी कम्पनियां निजी अस्पतालों को वैक्सीन बेच सकेंगी. सोमवार से केंद्र सरकार के अस्पतालों में भी 18 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन लगनी शुरू होगी.
पॉलिसी में बदलाव होने से बढ़ेगी वैक्सीनेशन की रफ्तार
माना जा रहा है कि नए नियम लागू होने पर वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ेगी, क्योंकि कई राज्यों की शिकायत थी कि उन्हें वैक्सीन कम मात्रा में मिल रही है. निर्माता कम्पनियों से वैक्सीन का कोटा नही मिल पा रहा था लेकिन अब केन्द्र वैक्सीन की खरीद से लेकर इसके वितरण की जिम्मेदारी सीधे केंद्र के पास होगी.
जानिए नई पॉलिसी की खास बातें..
कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले लोग सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों के वैक्‍सीनेशन सेंटर पर जाकर भी रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं.
सरकार स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स, 45 साल से ज्यादा उम्र के उन लोगों के टीकाकरण को प्राथमिकता देगी, जिन्हें वैक्सीन की दूसरी डोज़ लगवानी है. राज्य सरकारें अपनी तरफ से भी प्राथमिकताएं तय कर सकती हैं.
फाइज़र, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन जैसी विदेशी वैक्सीन्स की उपलब्धता के बारे में अब तक किसी इंतजाम को अंतिम रूप नहीं दिया गया है.

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