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एक ही युद्ध से हारे थे हनुमान जी क्या आप लोग जानते हैं नहीं तो तुरंत जानें

हनुमान परमेश्वर की भक्ति (हिंदू धर्म में भगवान की भक्ति) की सबसे लोकप्रिय अवधारणाओं और भारतीय महाकाव्य रामायण में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में प्रधान हैं। वह कुछ विचारों के अनुसार भगवान शिवजी के 11वें रुद्रावतार, सबसे बलवान और बुद्धिमान माने जाते हैं। रामायण के अनुसार वे जानकी के अत्यधिक प्रिय हैं। इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं। हनुमान जी का अवतार भगवान राम की सहायता के लिये हुआ। हनुमान जी के पराक्रम की असंख्य गाथाएं प्रचलित हैं। इन्होंने जिस तरह से राम के साथ सुग्रीव की मैत्री कराई और फिर वानरों की मदद से राक्षसों का मर्दन किया, वह अत्यन्त प्रसिद्ध है।
एक बार मछिंद्रनाथ जी रामेश्वरम में आते हैं। वहां श्रीराम द्वारा निर्मित रामसेतु देखकर अत्यधिक प्रसन्न होते हैं। और भगवान श्री राम की भक्ति में लीन होकर समुंद्र मैं स्नान करने लगते हैं, राम भक्त हनुमान वहां पर एक बूढ़े वानर के रूप में पहले से ही मौजूद होते हैं, उनकी नजर जैसे ही मछिंद्रनाथ पर पड़ती है, वह समझ जाते हैं कि यह सिद्ध योगी है। फिर हनुमान जी उस योगी की परीक्षा लेने की सोचते हैं, और अपनी शक्ति से जोरदार बारिश करवाने लगते हैं।
जब इस बारिश का भी मछिंद्रनाथ पर कोई प्रभाव नहीं होता है। तब हनुमान जी अपने बूढ़े वानर के रूप में पहाड़ को खोदते हैं। पहाड़ पर प्रहार करता देख योगी कहते हैं, कि हे वानर क्या तुम्हें मालूम नहीं की प्यास लगने पर कुआं नहीं खोदा जाता तुम्हें अपने सर पर छत का इंतजाम पहले ही कर लेना चाहिए था।
मछिंद्रनाथ की बात सुनकर बूढ़ा वानर उन्हें जवाब देता है, कि हनुमान जी से श्रेष्ठ और शक्तिशाली योद्धा पूरे संसार में कोई भी नहीं है। और कुछ समय तक मैंने भी उनकी सेवा की थी, जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने अपने शक्ति का कुछ हिस्सा मुझे दिया है, अगर आप इतने शक्तिशाली हैं तो आप मुझसे युद्ध कीजिए मछिंद्रनाथ जी वानर कि यह चुनौती स्वीकार कर लेते हैं। फिर दोनों के बीच युद्ध होता है, हनुमान जी उनके ऊपर बड़े बड़े चट्टानों से वार करते हैं।
और मछिंद्रनाथ जी अपने मंत्रों का जाप करके सभी चट्टानों को आसमान में ही रोक लेते हैं। यह सब देख हनुमान जी क्रोधित में आ जाता है, और वह सबसे बड़े पर्वत को अपने हाथों से उठाकर योगी जी की और फेंकने के लिए आगे बढ़ते हैं। लेकिन मंत्र की शक्ति से हनुमानजी आसमान में ही रह जाते हैं, मछिंद्रनाथ के मंत्र से हनुमान जी की सारी शक्तियां कुछ देर के लिए समाप्त हो जाते हैं। यह सब देखकर हनुमान जी के पिता वायु देव डर जाते हैं, और जमीन पर आकर मछिंद्रनाथ जी से हनुमान जी को क्षमा करने की प्रार्थना करते हैं।
तभी हनुमान जी अपने रूप में आ जाते हैं, और मछिंद्रनाथ जी के सामने हाथ जोड़ते हुए कहते हैं, कि मैं जानता था कि आप नारायण के अवतार हैं, फिर भी मैंने आपकी शक्तियों कि परीक्षा लेने का प्रयत्न किया। इस अपराध के लिए आप मुझे क्षमा कर दीजिए। यह सुनकर मछिंद्रनाथ जी हनुमान जी को क्षमा करते हैं।

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