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एक ऐसा मंत्र जो दिलाएगा हर संकट और बीमारियों से मुक्ति, जानिए कैसे

आज हम बात कर रहें, भक्ति योग के एक ऐसे उपाय के बारे में जो परम आदरणीय संत समाज की अत्यंत दयामयी कृपा से सुनने को मिला है कि इस उपाय को लम्बे समय तक करने से ना केवल सभी तरह की बिमारियों व सभी समस्याओं (जैसे- फर्जी मुकदमा, गरीबी, कर्जा, एक्सीडेंट, अपमान, दुष्टों का अत्याचार, किसी भी तरह की शारीरिक दिव्यांगता, घरेलु झगड़े, शारीरिक कुरूपता या कोई भी अन्य समस्या दुःख या मुसीबत) का निश्चित समाधान भी होता है बल्कि हर उचित मनोकामना भी उचित समय आने पर निश्चित पूर्ण होकर रहती है ! और अगर बिना धैर्य खोये हुए कोई इसे लगातार करता रहे तो अंततः उसे अनंत ब्रह्मांड अधीश्वरी महामाया जगदम्बा सरस्वती के प्रत्यक्ष दर्शन का महा सौभाग्य भी मिलता है !
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इसे जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि भक्ति कहतें किसे हैं ? भक्ति की सबसे आसान परिभाषा है,- ईश्वर में आसक्ति ! आसक्ति अर्थात लगाव जब तक सांसारिक चीजों या रिश्तों में रहता है तब तक निष्फल रहता है पर जब यही आसक्ति ईश्वर में हो जाती है तो महान चमत्कारी फल देने वाली हो जाती है !
जैसा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भक्ति योग के साधकों के लिए कहा है,- “कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा” ! अर्थात इस कलियुग में किसी भी कठिन कर्म काण्ड में उलझने की जरूरत नहीं है क्योंकि कठिन कर्मकाण्ड युक्त पूजा पाठ से मिलने वाले सारे लाभ आसानी से केवल भगवान् के नाम जप से भी बिल्कुल मिल सकतें हैं और नाम जप में सबसे बड़ी ख़ास बात यह है कि भगवान् के नाम जप को कभी भी, कहीं भी (यहाँ तक कि टॉयलेट में भी) आसानी से किया जा सकता है और इसमे सिर्फ लाभ ही लाभ है, हानि कुछ भी नहीं है, जबकि भगवान के मन्त्रों से युक्त कर्मकाण्ड युक्त पूजा पाठ को अशुद्ध उच्चारण या अशुद्ध जगह करने से लाभ की जगह हानि होने की संभावना बनी रहती है !
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माँ सरस्वती के यह तीन नाम, “सरस्वती सहस्त्रनाम स्तोत्र” में दिए गएँ हैं ! यह तीन नाम निश्चित रूप से महान दिव्य हैं क्योंकि इनका नियमित रूप से लम्बे समय तक जप करने से दुनिया का कौन सा उचित कार्य ऐसा है जो संभव ना हो सके !
इन तीन नामों को इस प्रकार जपें- “ जय माँ सरस्वती जितेन्द्रिया अनन्ता “
आईये बतातें हैं परम आदरणीय संतसमाज अनुसार इन नामों का सक्षिप्त परिचय व लाभ-
इन नामो में जो “अनन्ता” नाम है उसे शास्त्रों में दुनिया की, सभी तरह की समस्याओं व सभी तरह की बीमारियों का सबसे बड़ा निदान कहा गया है क्योंकि अनन्ता का मतलब होता है, देवी के द्वारा बनाए गये अनंत ब्रह्मांडो में व्याप्त देवी के अनंत रूप !
इसलिए जब कोई स्त्री/पुरुष देवी के “अनन्ता” नाम को बार बार काफी लम्बे समय तक जपता है तो अनंत ब्रह्मांडों में व्याप्त हर कण कण में देवी सरस्वती का ही आवाहन व प्रकटी करण होने लगता है जिसकी वजह से उस स्त्री/पुरुष के लिए धीरे धीरे कोई भी चीज, किसी भी तरह से हानिकारक, नुकसानदायक, घातक नहीं रह जाती है बल्कि हर कण कण में स्वयं जगदम्बा के प्रकटीकरण की वजह से हर वस्तु बेहद फायदेमंद साबित होने लगतें हैं ! यहाँ तक कि कई वर्षों तक प्रेमपूर्वक नियमित जप करने से घोर विष भी अमृत की तरह गुणकारी हो जाता है !

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