Home Health Tips अस्थमा से लाइफटाइम छुटकारा चाहतें हैं, ये 3 प्राणायाम

अस्थमा से लाइफटाइम छुटकारा चाहतें हैं, ये 3 प्राणायाम

क्या है अस्थमा रोग ?
अस्थमा / दमा या श्वास रोग मुख्यत: एक श्वसन प्रणाली का रोग है जिसमे रोगी को आसानी से श्वास – प्रश्वास करने की क्रिया में दिक्कत आती है | इस रोग में श्वास नलिकाओं में बलगम और इन्फेक्शन के कारण आये सुजन की वजह से रोगी श्वास लेने में दिक्कत महसूस करता है, साथ ही श्वांस लेते समय शु-शु की आवाज भी करता है | कभी – कभार रोग की गंभीरता पर रोगी को Asthmatic Attack भी आ सकते है | रोग की शुरुआत एलर्जी एवं सामान्य सर्दी जुकाम से होती है , फिर बाद में धीरे – धीरे रोग बढ़ता जाता है एवं अस्थमा का रूप ले लेता है |
अस्थमा के नियंत्रण में योग की भूमिका
श्वास में सबसे अधिक शरीर की श्वसन प्रणाली प्रभावित होती है | योग की गहरी यौगिक श्वास क्रियाओं के माध्यम से श्वास लेने की दिक्कतों को कम किया जा सकता है | योग के प्राणायाम जैसे नाड़ी – शौधन प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, सूर्यभेदी प्राणायाम आदि में श्वास – प्रश्वास की गति तीव्र और बलशाली होती है जिससे अस्थमा रोग में लाभ मिलता है | योग के कुच्छ आसन जैसे कन्धरासन, भुजंगासन, धनुरासन आदि के नियमित अभ्यास से अस्थमा रोग से छुटकारा पाया जाता है |
अस्थम (दमा) के लिए करें ये योग एवं प्राणायाम
अस्थमा से छुटकारा पाने के लिए आप योग के इन आसनों एवं प्राणायामों को अपना सकते है |
1. सूर्य भेदन प्राणायाम
सूर्यभेदन प्राणायाम करने से अस्थमा रोग में काफी लाभ मिलता है | इस प्राणायाम की खासियत यह है की इसे करने से शरीर में उष्णता बढती है, जिसके कारण शरीर में स्थित वात एवं कफ का शमन होता है | सूर्य भेदी प्राणायाम की अधिक जानकारी के लिए आप इस आर्टिकल को पढ़ें – सूर्यभेदी प्राणायाम
श्वास रोग से छुटकारे के लिए कुम्भक के समय को नियमित अभ्यास से बढाने का प्रयास करे | हठ योग में लिखा है की सुर्यभेदी प्राणायाम में कुम्भक तब तक करना चाहिए जब तक की शरीर से पसीना न निकल जाए |
2. उज्जायी प्राणायाम
इस प्राणायाम को करने से फुफुस पूरा फैलता है एवं श्वास की क्रिया बढती है साथ ही कफ का नाश होता है एवं जठराग्नि बढती है | इसके नियमित अभ्यास से अस्थमा में काफी आराम मिलता है |
विधि – सिद्धासन या पद्मासन में बैठ जाएँ | अब अपनी दोनों नासिका द्वारो से धीरे – धीरे वायु खींचे | वायु को ऐसे खींचे की वह शब्द करती हुई कंठ तक भर जाए | अब इसी स्थिति में कुछ समय कुम्भक करे | तत्पश्चात बाएं नासिका द्वार से रेचक (श्वांस छोड़ने) की क्रिया करे | श्वास अन्दर लेते समय छाती को यथासंभव फुलाएं |
3. अस्थमा के लिए भस्त्रिका प्राणायाम
अस्थमा के लिए योग में भस्त्रिका प्राणायाम भी प्रमुख रूप से लाभकारी सिद्ध होता है | भस्त्रिका का अर्थ धौंकनी होता है इस में श्वास और प्रश्वास की गति तीव्र और बलशाली एवं सशक्त होती है | इसे अपनाने से फेफड़े मजबूत बनते है एवं इसी कारण से  अस्थमा (श्वास) रोग से छुटकारा पाया जा सकता है |

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