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पीरियड्स के दौरान महिलाएं अधिकतर करती है ये काम जिससे उनकी सेहत को हो सकता है भारी नुकसान, आइए जाने

जिदंगी में अपने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को नजरअंदाज करना मानव का स्वभाव बन गया है। ऐसी ही कुछ स्थिति महिलाओं की भी है। बता दें, शहरी महिलाएं व्यस्त होने के कारण तो ग्रामीण महिलाएं अज्ञानता की वजह से अक्सर अपने मासिक धर्म या माहवारी के दौरान स्वच्छता का ध्यान नहीं रखती हैं। ऐसा करने वाली महिलाएं इस बात से अनजान रहती हैं कि इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। महिलाएं इस वजह से बांझपन तक की शिकार बन सकती हैं। यही वजह है कि माहवारी यानी पीरियड्स के दौरान सफाई रखने की सलाह दी जाती है।
आज भी कई महिलाएं मासिक धर्म के दौरान कपड़े का ही इस्तेमाल करती हैं। ऐसा करने से पहले ना तो वो कपडे को धोती हैं ना ही धूप में सुखाती हैं, जिस वजह से कपड़े में जीवाणु पैदा हो जाते हैं। इस गंदे कपड़े का दोबारा इस्तेमाल करने का मतलब होता है कई गंभीर बीमारियों को न्योता देना। ऐसे में माहवारी के दौरान स्वच्छता का खास ख्याल रखना चाहिए। महिलाओं को हर महीने मासिक धर्म से गुजरना पडता है। ऐसे समय में उन्हें कपड़े की जगह सैनिटरी नैपकिन, टिशू पेपर, हैंड सैनिटाइजर, तौलिए, एंटीसेप्टिक दवा हमेशा अपने साथ रखनी चाहिए।
दोस्तों अज्ञानता और पैसे बचाने के चलते महिलाएं कई बार माहवारी के समय सैनिटरी नैपकिन का प्रयोग नहीं करतीं। वह कपड़े का प्रयोग करना ही बेहतर समझती हैं, क्योंकि ऐसा करना उनके लिए आसान होता है, हालांकि ऐसा करते समय वो अनजाने में ही सही अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही होती हैं। यही वजह है कि महिलाएं कई तरह के संक्रमण की भी जल्दी शिकार हो जाती हैं। योनि में खुजली, पीला गाढ़ा स्राव, कभी-कभी हरे रंग के पानी का स्राव भी उनकी परेशानी का सबब बन जाता है। इस तरह के संक्रमण के बार-बार होने से कई बार महिलाएं बांझपन जैसी बीमारियों की भी शिकार हो जाती हैं।
दोस्तों महिलाओं को चाहिए कि वो निरंतर पैड बदलती रहें। ऐसा ना करने पर पीरियड्स के दौरान गीले पैड की वजह से उनकी स्किन पर लाल चकत्ते पड़ सकते हैं। ऐसा होने पर नहाने के बाद और सोने से पहले इन लाल चकत्तों पर एंटीसेप्टिक दवा लगाएं। एंटीसेप्टिक लगाने से जलन से राहत मिलने के साथ रेश भी जल्दी ठीक हो जाएंगे।
दोस्तों इस्तेमाल किए गए पैड को कभी भी दोबारा प्रयोग में ना लाएं। इसके अलावा इसे किसी पेपर या अन्य चीज में लपेटकर ही फेंके वरना संक्रमण का खतरा बना रहता है। माहवारी के दौरान महिलाओं को अपने प्राइवेट पार्ट्स को बार-बार धोना चाहिए। ऐसा करते समय ध्यान रखें कि अपने हाथ को आगे से पीछे की ओर लेकर जाएं। अगर आप अपने हाथ को पीछे से आगे की ओर लेकर जाएंगे तो वहां मौजूद बैक्टीरिया प्राइवेट पार्ट्स के आसपास रह सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बन सकता है।
माहवारी के दौरान महिलाओं को कभी भी अपनी प्राइवेट पार्ट्स को साबुन से नहीं साफ करना चाहिए। प्राइवेट पार्ट्स को साफ करने के लिए सिर्फ गुनगुने पानी का ही प्रयोग बेहतर होता है। नियमित रूप से प्राइवेट पार्ट्स को साफ करते रहना बेहतर होता है। ऐसा करने से बैक्टीरिया तो मरते ही हैं साथ ही दुर्गंध भी दूर होती है।

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