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चाणक्य के अनुसार इन चार प्रकार के लोग जीवन में कभी नहीं बन सकते अमीर

चाणक्य नीति या चाणक्य नीतिशास्त्र, चाणक्य द्वारा रचित एक नीति ग्रन्थ है। संस्कृत-साहित्य में नीतिपरक ग्रन्थों की कोटि में चाणक्य नीति का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसमें सूत्रात्मक शैली में जीवन को सुखमय एवं सफल बनाने के लिए उपयोगी सुझाव दिये गये हैं। इसका मुख्य विषय मानव मात्र को जीवन के प्रत्येक पहलू की व्यावहारिक शिक्षा देना है। इसमें मुख्य रूप से धर्म, संस्कृति, न्याय, शांति, सुशिक्षा एवं सर्वतोन्मुखी मानव जीवन की प्रगति की झाँकियां प्रस्तुत की गई हैं। इस नीतिपरक ग्रंथ में जीवन-सिद्धान्त और जीवन-व्यवहार तथा आदर्श और यथार्थ का बड़ा सुन्दर समन्वय देखने को मिलता है।
आचार्य चाणक्य को एक लोकप्रिय शिक्षक, दार्शनिक, अर्थशास्त्री, न्यायविद और शाही सलाहकार के रूप में जाना जाता है. आचार्य चाणक्य पाटलीपुत्र के महान विद्वान थे. इतने बड़े साम्राज्य के मंत्री होने के बाद भी वह एक साधारण सी कुटिया में रहना पसंद करते थे. साथ ही वह बेहद ही सादा जीवन जीने में यकीन रखते थे. चाणक्य ने अपने जीवन से मिले कुछ अनुभवों को एक किताब ‘चाणक्य नीति’ में जगह दी है. आचार्य चाणक्य की नीति ग्रंथ में मनुष्य के लिए कई नीतियों का उल्लेख है. यदि मनुष्य अपने जीवनकाल में इन नीतियों का अनुसरण करता है तो उसका जीवन सुखमय हो जाता है. उन्होंने एक श्लोक के माध्यम से उन 4 लोगों के बारे में बताया है, जो कभी अमीर नहीं हो सकते. कौन हैं वो लोग, आईये जानते हैं.
श्लोक
कुचैलिनं दन्तमलोपधारिणं बह्वाशिनं निष्ठुरभाषिणं च।
सूर्योदये चास्तमिते शयानं विमुञ्चतिश्रीर्यदि चक्रपाणि:।।
ये 4 प्रकार के लोग कभी नहीं हो सकते अमीर
*चाणक्य ने कहा है कि जो लोग गंदे वस्त्र धारण करते हैं उनके पास लक्ष्मी कभी नहीं आती है. जो लोग गंदगी पसंद करते हैं, अपने आसपास साफ-सफाई का ख्याल नहीं रखते, उन पर धन की देवी लक्ष्मी की कृपा नहीं बरसती. साथ ही ऐसे लोग समाज को भी पसंद नहीं आते और उन्हें हर तरह से निरादर का सामना करना पड़ता हैं.
*चाणक्य के मुताबिक जो व्यक्ति भूख से अधिक खाता है, वह भी कभी धनवान नहीं हो सकता. दरिद्रता मनुष्य को धीरे-धीरे गरीबी में झोंकती जाती है. साथ ही जरूरत से ज्यादा खाना खाने वाले व्यक्ति की सेहत भी सही नहीं रहती. वह हमेशा किसी न किसी बीमारी से घिरा रहता है.
*कड़वे वचन बोलने वाले लोग भी हमेशा गरीब ही रहते हैं. चाणक्य के अनुसार हर व्यक्ति को मीठा बोलना चाहिए और जो अपनी वाणी से दूसरों के मन को ठेस पहुंचाते हैं, उनसे लक्ष्मी हमेशा नाराज रहती है. कठोर वाणी बोलने वाले लोगों पर लक्ष्मी की कृपा नहीं बरसती और न ही उनका कोई मित्र होता है. ऐसे लोगों के दुश्मन बहुत अधिक होते हैं और वह हमेशा दुश्मनों से घिरे रहते हैं.
*जो व्यक्ति सुबह से लेकर शाम तक बस सोया ही रहता है, वह भी कभी धनवान नहीं बन सकता. चाणक्य के मुताबिक जो लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक नींद में ही रहते हैं, उन पर माता लक्ष्मी की कृपा कभी नहीं बरसती. वह हमेशा पैसों की तंगी से जूझते हैं. बिना कारण के सोना मनुष्य के लिए हानिकारक बताया गया है.

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