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घर में गरीबी बनी रहती है तो प्रतिदिन करें इस चौपाई का पाठ

गरीबी या निर्धनता जीवन जीने के साधनों या इस हेतु धन के अभाव की स्थिति है।
“गरीबी उन वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति का अभाव है जो व्यक्ति तथा उसके परिवार के स्वास्थ्य और कुशलता को बनाये रखने में आवश्यक है।” इस प्रकार केवल भोजन, वस्त्र और आवास के प्रबन्ध से ही निर्धनता की समस्या समाप्त नहीं हो जाती. बल्कि व्यक्तियों के लिए ऐसी वस्तुएँ भी प्राप्त होना आवश्यक है जिससे स्वास्थ्य और कुशलता का एक सामान्य स्तर बनाये रखा जा सके।
आपके घर में अमीरी कितनी आएगी यह कहा नहीं जा सकता पर आपके घर में गरीबी कभी प्रवेश नहीं करेगी अगर आप इन आठ चौपाइयों का प्रतिदिन पाठ करते है
दोहा :
1 श्री गुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
2 बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥
भावार्थ:-श्री गुरुजी के चरण कमलों की रज से अपने मन रूपी दर्पण को साफ करके मैं श्री रघुनाथजी के उस निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फलों को (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को) देने वाला है।
चौपाई :
3 जब तें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए॥
4 भुवन चारिदस भूधर भारी। सुकृत मेघ बरषहिं सुख बारी॥
भावार्थ:-जब से श्री रामचन्द्रजी विवाह करके घर आए, तब से (अयोध्या में) नित्य नए मंगल हो रहे हैं और आनंद के बधावे बज रहे हैं। चौदहों लोक रूपी बड़े भारी पर्वतों पर पुण्य रूपी मेघ सुख रूपी जल बरसा रहे हैं॥
5 रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई॥
6 मनिगन पुर नर नारि सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती॥
भावार्थ:-ऋद्धि-सिद्धि और सम्पत्ति रूपी सुहावनी नदियाँ उमड़-उमड़कर अयोध्या रूपी समुद्र में आ मिलीं। नगर के स्त्री-पुरुष अच्छी जाति के मणियों के समूह हैं, जो सब प्रकार से पवित्र, अमूल्य और सुंदर हैं॥
7 कहि न जाइ कछु नगर बिभूती। जनु एतनिअ बिरंचि करतूती॥
8 सब बिधि सब पुर लोग सुखारी। रामचंद मुख चंदु निहारी॥
भावार्थ:-नगर का ऐश्वर्य कुछ कहा नहीं जाता। ऐसा जान पड़ता है, मानो ब्रह्माजी की कारीगरी बस इतनी ही है। सब नगर निवासी श्री रामचन्द्रजी के मुखचन्द्र को देखकर सब प्रकार से सुखी हैं॥

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