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कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए बच्चों का विशेष हॉस्पिटल बना रही है ये सरकार, आइए जाने

कोरोनावायरस (Coronavirus) कई प्रकार के विषाणुओं (वायरस) का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न करता है। यह आरएनए वायरस होते हैं। इनके कारण मानवों में श्वास तंत्र संक्रमण पैदा हो सकता है जिसकी गहनता हल्की (जैसे सर्दी-जुकाम) से लेकर अति गम्भीर (जैसे, मृत्यु) तक हो सकती है।
कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) की तीसरी लहर आने के खतरे को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. तीसरी लहर (Corona Third Wave) का बच्चों पर सबसे ज्यादा असर होने की आशंका को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार मुंबई के मलाड इलाके में बड़े कोविड केयर अस्पताल (Covid Care Hospital) का निर्माण कर रही है. यह विशेष कोविड केयर अस्पताल बच्चों के लिए होगा और इस अस्पताल में कोरोना से संक्रमित होने वाले बच्चों को भर्ती कर उनका इलाज किया जाएगा.
मलाड इलाके में रहेजा ग्राउंड में मुंबई के अब तक के सबसे बड़े अस्पताल के निर्माण का कार्य बड़ी ही तेजी के साथ किया जा रहा है. इस अस्पताल को बनाने में लगे वर्कर दिन-रात काम कर रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द वह बनकर तैयार हो जाए, क्योंकि सरकार ने इसका निर्माण 22-25 दिनों में बनाने का लक्ष्य रखा है.
इस कोविड अस्पताल में कुल 2140 बेड होंगे, जिसमें से 1538 ऑक्सीजन वाले बेड, 384 आइसोलेशन बेड, 190 आईसीयू बेड और बाकी के जनरल बेड होंगे. ऐसा पहली बार होगा जब मुंबई में इतना बड़ा कोविड अस्पताल बनाया जा रहा है, ताकि बच्चों के संक्रमित होने की स्थिति में उन्हें तुरंत बेड मुहैया कराकर उनका इलाज शुरू किया जा सके.
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा कि तीसरी लहर को देखते हुए हमने तैयारियां शुरू कर दी हैं और इन्हीं तैयारियों के तहत यह अस्पताल बनाया जा रहा है.
इस अस्पताल के अलावा मुंबई के चार बड़े कोविड अस्पतालों बीकेसी, दहिसर, मुलुंड और नेस्को में भी बच्चों के लिए अलग से वार्ड बनाए जा रहे हैं. यह वो अस्पताल हैं, जहां पहले से कोरोना मरीजों का इलाज तो चल ही रह है, लेकिन इनमें अब बच्चों के लिए भी वार्ड बनाए जाएंगे, ताकि बच्चों पर पड़ने वाली कोरोना की तीसरी लहर से उन्हें बचाया जा सके.
इसके अलावा बच्चों के लिए बनाई गई चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टास्क फोर्स को भी सतर्क रहने को कहा गया है और दवाइयों सहित तमाम जरूरी इंतजाम करने का आदेश दिया गया है.
कोरोना की तीसरी लहर के जुलाई-अगस्त में आने का अंदेशा जताया जा रहा है. कोरोना की पहली लहर का असर बुजुर्गों पर और दूसरी लहर का असर युवाओं पर पड़ा और इन दोनों लहरों के दौरान देश में महाराष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहने वाला राज्य था. इस दौरान महाराष्ट्र सरकार की तैयारियां न करने को लेकर खूब किरकिरी भी हुई थी, जिससे सबक लेते हुए तीसरी लहर से निपटने के लिए वे अभी से कमर कसने लगी है.

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