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अगर आपके पालतू जानवर में दिखे ये लक्षण तो हो सकता है कोरोनावायरस का खतरा, आइए जाने

कोरोनावायरस (Coronavirus) कई प्रकार के विषाणुओं (वायरस) का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न करता है। यह आरएनए वायरस होते हैं। इनके कारण मानवों में श्वास तंत्र संक्रमण पैदा हो सकता है जिसकी गहनता हल्की (जैसे सर्दी-जुकाम) से लेकर अति गम्भीर (जैसे, मृत्यु) तक हो सकती है।
कोरोना संक्रमण का खतरा इंसान को ही नहीं, बल्कि जानवरों के लिए भी उतना ही है. कोरोना संक्रमण इंसानों से जानवरों को भी हो सकता है. घर में पल रहे जानवर के साथ जंगली जानवरों को भी इसका उतना ही खतरा है.
इसकी पुष्टि भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के वैज्ञानिकों ने की है. उनका कहना है कि ज्यादातर जानवर घरों के भीतर, जू और वाइल्ड सेंचुरी में संक्रमित इंसानों के करीब आने से कोरोना संक्रमित होते हैं.
डॉक्टर्स का कहना है कि जिस तरह इंसान इस वायरस से बच रहा है उसी तरह जानवरों का बचाव करना भी जरूरी है. अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) ने बताया कि अब तक मिले डाटा के अनुसार इंसानों से जानवरों को संक्रमण का खतरा ज्यादा है, जबकि जानवर से इंसान के इंफेक्टेड होने की संभावना बेहद कम है. लेकिन एक जानवर दूसरे जानवर को संक्रमित कर सकता है.
कुत्तों में ये है लक्षण
जानवरों में इंसानों जैसे बुखार, सांस फूलना आदि लक्षण नहीं आते, बल्कि डायरिया की समस्या होती है और उनका शरीर बेहद कमजोर होने लगता है. कुत्तों में इसका असर 7 से 8 दिन तक रहता है.
कुत्तों में कहलाता है कैनाइन कोरोना वायरस
कुत्तों को होने वाला वायरस कोविड-19 का वायरस नहीं बल्कि कैनाइन कोरोना वायरस कहलाता है. इसका टीका कई साल पहले बन चुका है. जिसकी हर साल 30 दिन के अंदर दो डोज लगाई जाती है. मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी मिश्र ने बताया कि कैनाइन कोरोना की वैक्सीन को अलग से लगवाया जाता है.
कुछ की ही होती है मौत
डॉक्टर का कहना है कि कैनाइन कोरोना का संक्रमण केवल पांच फीसद कुत्तों में ही देखने को मिलता है. जिनमें कुछ की मौत भी हो जाती है.
ये हैं सुझाव
गले के पट्टे और चेन को रखें साफ
मास्क ना लगाएं
बाकी जानवरों से रखें दूर
सफाई का रखें पूरा ख्याल

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