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वेस्टइंडीज से भारत आए थे पढ़ाई करने, लेकिन बन गए टीम इंडिया के अहम क्रिकेटर,

रॉबिन सिंह एक पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी है जो भारतीय क्रिकेट टीम के लिए वनडे क्रिकेट और साथ ही टेस्ट क्रिकेट मैच भी खेला करते थे। हालांकि इनका जन्म 14 सितम्बर 1963 को भारत की बजाय प्रिंस टाउन ,त्रिनिदाद और टोबैगो में हुआ था। इन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 1989 से लेकर 2001 तक कुल 1 मात्र टेस्ट मैच और 136 वनडे मैच खेले थे। जिसमें इन्होंने एक हरफनमौला खिलाड़ी की भूमिका निभाई थी। इसके बाद इन्होंने क्रिकेट में कोचिंग यानी प्रशिक्षक के तौर भी कैरियर बनाया और इंडियन प्रीमियर लीग के 2010 के आईपीएल में मुम्बई इंडियन्स की फ्रेंचाइज के कप्तान रहे थे। जबकि साथ में कैरिबियन प्रीमियर लीग में बारबाडोस ट्रिडेंट के 2013 तक कोच के पद पर रहे थे। इन सबके अलावा इन्होंने आईपीएल में डेक्कन चार्जर्स के लिए भी कोचिंग की थी। ये अपने क्रिकेट कैरियर में हमेशा एक दम फिट और अच्छे रहे हैं।

नब्बे के दशक में टीम इंडिया में इनका वही मुकाम था जो आज के ज़माने में हार्दिक पांड्या का है। यानि ये गेंद और बल्ले, दोनों से टीम इंडिया के संकट मोचक हुआ करते थे। आज यानि 14 सितंबर को इनका जन्मदिन है। 1963 में पैदा हुए रॉबिन सिंह की कहानी किसी फिल्म जैसी ही लगती है। तो आज जानते हैं कि कैसे वेस्टइंडीज़ के रॉबिन सिंह पढ़ने के लिए भारत आए थे लेकिन बन गए टीम इंडिया के अहम क्रिकेटर।
वेस्टइंडीज़ के ट्रिनिडाड में पैदा हुए रॉबिन सिंह का पूरा नाम है रवीन्द्र रामनारायण सिंह। तकरीबन 150 साल पहले इनके पूर्वज वेस्टइंडीज़ जाकर बस गए थे। इनकी क्रिकेटिंग लाइफ की शुरूआत भी वहीं से हुई थी। वेस्टइंडीज़ में रॉबिन सिंह स्कूल और क्लब लेवल पर क्रिकेट खेला करते थे।
एक बार भारत से हैदराबाद ब्लूज़ नाम की एक टीम वेस्टइंडीज़ में एक क्रिकेट टूर्नामेंट में हिस्सा लेने गई थी। हैदराबाद ब्लूज़ का मुकाबला ट्रिनिडाड से था और रॉबिन सिंह ट्रिनिडाड की तरफ से खेल रहे थे। इस मैच में रॉबिन सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया। उनके प्रदर्शन से खुश होकर हैदराबाद ब्लूज़ के सदस्य रहे अकब इब्राहिम नाम के एक शख्स ने रॉबिन को भारत आने का न्यौता दिया। सन 1982 में जब रॉबिन सिंह 19 साल के थे, तब वो पहली दफा चेन्नई, उस दौर के मद्रास आए थे।
यहां आकर रॉबिन ने यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई शुरू कर दी। पढ़ाई के साथ-साथ ही रॉबिन ने क्रिकेट खेलना भी शुरू कर दिया। क्रिकेट ने भारत और रॉबिन के बीच एक ऐसा रिश्ता कायम कर दिया कि रॉबिन फिर हमेशा के लिए यहीं के बन कर रह गए। हालांकि भारत की नागरिकता पाने के लिए रॉबिन सिंह को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। 1989 में रॉबिन को भारत की नागरिकता मिली। उसी साल वेस्टइंडीज़ दौरे के लिए उनका सेलेक्शन टीम इंडिया में हो गया।
रॉबिन सिंह उस दौर के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक हैं जो अपनी बेहतरीन फील्डिंग स्किल्स के लिए जाने जाते थे। रॉबिन ने अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला 11 मार्च 1989 में उस देश के खिलाफ खेला जो उनकी जन्मभुमि था। यानि वेस्टइंडीज़। हालांकि उस सीरीज़ में रॉबिन को कुल दो ही मैचों में मौका मिला था और इन दोनों ही मैचों में वो कोई खास कमाल नहीं कर पाए थे। लेकिन इसके बाद टीम इंडिया में फिर से वापसी करने में रॉबिन को 7 साल लग गए। 1996 में रॉबिन सिंह को टाइटन कप के लिए टीम इंडिया में फिर से चुना गया। इसके बाद वो 2001 तक टीम इंडिया के रेगुलर क्रिकेटर रहे।
मौजूदा वक्त में रॉबिन सिंह आईपीएल फ्रेंचायजी मुंबई इंडियंस के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा हैं। रॉबिन ने भारत के लिए 136 वनडे मुकाबले खेले। इन मैचों में रॉबिन ने 2336 रन बनाए और 69 विकेट भी चटकाए। वहीं प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रॉबिन सिंह ने 137 मैच खेले और 6997 रन बनाए। 172 विकेट भी अपने नाम किए।

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