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यूपी में कोरोना के मरीज़ों का बेहतर इलाज करने के लिये अब एमबीबीएस के चौथी और पांचवें वर्ष के छात्रों को भी करनी होगी कोविड ड्यूटी, आइए जाने

कोरोनावायरस (Coronavirus) कई प्रकार के विषाणुओं (वायरस) का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न करता है। यह आरएनए वायरस होते हैं। इनके कारण मानवों में श्वास तंत्र संक्रमण पैदा हो सकता है जिसकी गहनता हल्की (जैसे सर्दी-जुकाम) से लेकर अति गम्भीर (जैसे, मृत्यु) तक हो सकती है।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण (Corona Infection) और मरीजों के बेहतर इलाज के लिए सूबे की योगी सरकार (Yogi Government) ने बड़ा फैसला लिया है. कोरोना के मरीज़ों का बेहतर इलाज करने के लिये अब एमबीबीएस (MBBS Students) के चौथी और पांचवें वर्ष के छात्रों को भी कोविड ड्यूटी पर लगाया जायेगा. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बारे में निर्देश दिये हैं. साथ ही कोविड के इलाज के लिये साधनों को बेहतर बनाने के लिये निजी अस्पतालों व प्रयोगशालाओं को अधिग्रहीत करने का फ़ैसला भी लिया गया है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना की समीक्षा बैठक के दौरान निर्देश दिए कि संक्रमण की वजह से MBBS छात्रों की परीक्षा निरस्त हुई है. लिहाजा उनकी ड्यूटी अस्पतालों में लगायी जाए ताकि, अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी से कुछ हद तक निपटा जा सके. दरअसल, राजधानी लखनऊ में केजीएमयू समेत कई सरकारी कॉलेज में कई डॉक्टर व चिकित्सा अधिकारी कोरोना संक्रमित है. इस बीच यह भी शिकायत आ रही है कि अस्पतालों में डॉक्टर की कमी हो रही है.
गुजरात से मंगाई जाएगी रेमडिसीवेर दवा
उधर कोरोना नियंत्रण को लेकर लगातार फेउसले ले रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रेमडिसीवेर दवा की कमी को देखते हुए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि वे गुजरात से 25 हजार की खेप तुरंत मंगवाएं.
कानून मंत्री भी उठा चुके हैं सवाल
बता दें यूपी सरकार में कानून मंत्री बृजेश पाठक ने भी एक पत्र लिखकर मेडिकल सुविधाओं पर सवाल उठाए है. उन्होंने लिखा है कि प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना की जांच बंद हो गई है, जो बेहद गलत है. शहर में इस वक्त 17 हजार कोविड जांच किटों की ज़रूरत है, लेकिन 10 हजार ही मिल रही हैं. मंत्री का कहना है कि लोग लगातार मदद के लिए फोन कर रहे हैं, लेकिन सुविधा नहीं है. इसलिए मदद भी नहीं हो पा रही है. इतना ही नहीं, मंत्री ने शिकायत की है कि स्वास्थ्य अधिकारी के दफ्तर में फोन नहीं उठाया जाता है, जिसके कारण दिक्कतें हो रही हैं. मंत्री ने अपनी चिट्ठी में अपील की है कि अस्पतालों में बेड की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए, टेस्टिंग पर भी ज़ोर दिया जाए.

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