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जूते और चप्पलों को घर के इस स्थान पर रखना चाहिए, तुरंत जान ले नहीं तो बाद में पछताना पड़ेगा

संस्कृत में कहा गया है कि… गृहस्थस्य क्रियास्सर्वा न सिद्धयन्ति गृहं विना। वास्तु शास्त्र घर, प्रासाद, भवन अथवा मन्दिर निर्मान करने का प्राचीन भारतीय विज्ञान है जिसे आधुनिक समय के विज्ञान आर्किटेक्चर का प्राचीन स्वरुप माना जा सकता है। जीवन में जिन वस्तुओं का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होता है उन वस्तुओं को किस प्रकार से रखा जाए वह भी वास्तु है वस्तु शब्द से वास्तु का निर्माण हुआ है
वास्तु नियम:हम अपने जूते चप्पल घर की देहरी पर उतार देते है या फिर अंदर लेकर चले आते है। ऐसा करना न केवल वास्तु शास्त्र के हिसाब से गलत है वहीं ज्योतिष शास्त्र में भी घर में शुद्धता रखने की बात कही गई है। घर जितना शुद्ध रहेगा उतना ही घर में लक्ष्मी का वास बना रहेगा।
वास्तु शास्त्र में ऐसी बातें बताई गई है जिनके माध्यम से घरेलू समस्याओं का समाधान आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ वास्तु नियमों का पालन करना होगा। जिससे आपके घर में प्रवेश होने वाली नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी और आपके घर में सुख-शांति बनी रहेगी। उपयोग में आने वाले जूते – चप्पल को एक व्यवस्थित ढंग से, उचित स्थान पर हमेशा पश्चिम की ओर ही रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार जो जूते चप्पल उपयोग के न हों उन्हें घर में ना रखें उन्हें किसी गरीब को देदें ।पुराने जूते चप्पल रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आपके घर से समस्याऐं जाने का नाम ही नहीं लेती हैं।ऐसा करने से शनि देव का प्रकोप भी कम होता है ।
परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि घर में पूरी तरह साफ-सफाई रहे, गंदगी न हो, धुल-मिट्टी न हो। गंदगी के कारण हमारे स्वास्थ्य को तो नुकसान है साथ ही इससे हमारी आर्थिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।जूते-चप्पल से संबंधित कुछ ऐसी बातें हैं, जिनका ध्यान न रखने पर बहुत सारी अनचाही समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है। बाहर से आते समय घर के दरवाजे पर ही जूते-चप्पल उतार दें। इससे बाहरी गंदगी और धूल घर में नहीं आती। घर भी साफ -सुथरा रहता है।
वैसे तो यह काफी प्राचीन परंपरा है जिसे सिर्फ एक रूढि़वादिता नहीं माना जा सकता बल्कि यह साइंटिफिक फैक्ट है। घर में जूते रखने के लिए एक स्थान रखें। जहां पर परिवार के सभी सदस्य सलीके से अपने जूते पहनें और उतारें। जिन लोगों के घर में जूते इधर-उधर बिखरे रहते हैं, वहां शनि की अशुभता का प्रभाव रहता है। शनि को पैरों का कारक माना गया है इसलिए पैरों से सम्बद्ध रखने वाली किसी भी वस्तु को साफ़-सुथरा और यथाक्रम रखना चाहिए। किसी से जूते गिफ्ट में न लें अन्यथा उसका अभाग्य आपके भाग्य का नाश कर देगा।
यदि दांयी ओर की खिडकी किसी गोदाम में या स्टोर में खुलती है या किसी भी तरह का खिडकी में दोष उत्पन्न हो रहा हो तो पिता-पुत्र में आपस में नहीं बनती है. वे सदा किसी ना किसी बात पर पर आपस में लड़ते ही रहते है. परिवार के पुत्र तमोगुणी होने लगते है. घर में सूर्य का प्रकाश पहुंचना बहुत ही जरूरी होता है. जिस घर में सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंचता है, पूर्व में कोई खिडकी नहीं होती है. या घर के अन्दर दिन में भी अँधेरा रहता है, गेंहू आदि खाने पीने की चीजों पर प्रकाश की किरणें नहीं पहुँचती है तो समझ लीजिए उस घर में सूर्य-शनि का कुप्रभाव है. ऐसे घर के स्वामी और परिजनों को नींद ना आने की बिमारी, शरीर में टूटन, बेचैनी सदा ही बनी रहेगी.
किसी भी घर में दांयी या बाँयी खिडकी, आगंतुक व्यक्ति के प्रवेश एवं निकलने के समय दांयी ओर व बाँयी ओर की खिडकी का विचार किया जाता है. घर में बाँयी खिडकी का प्रति निधि ग्रह चन्द्रमा है. ज्योतिष में चन्द्रमा स्त्री ग्रह है और जगत माता का रूप है. अगर घर की बाँयी ओर वाली खिडकी ठीक ठाक है. उनमे से पर्याप्त हवा व प्रकाश घर में आ रहा है तो तो कोई गंभीर समस्या घर में उत्पन्न नहीं होती है. घर की बेटियाँ तथा स्त्रियाँ हमेशा सुखी रहती है. इसके विपरीत घर के बाँयी ओर यदि खिड़कियां ही ना हो तो घर में एक व्यक्ति अवश्य ही निठल्ला रहता है. और वह मानसिक रूप से भी विकृत एवं बीमार रहता है. चन्द्रमा मस्तिष्क का स्वरूप है. और घर में बाँयी ओर का भाग पाप ग्रह केतु से प्रभावित रहता है.
शास्त्र के अनुसार जिस घर में गंदगी रहती है वहां कई प्रकार की आर्थिक हानि होती हैं और हमेशा पैसों की तंगी बनी रहती है। जब भी हम कहीं बाहर जाते हैं तब हमारे जूते-चप्पलों में गंदगी लग जाती है जिसे लेकर हम घर आ जाते हैं। काफी लोग घर में जूते-चप्पल पहनते हैं जबकि शास्त्रों के अनुसार घर में नंगे पैर ही रहना चाहिए क्योंकि घर में कई स्थान देवी-देवताओं से संबंधित होते हैं उनके आसपास जूते-चप्पल लेकर जाना शुभ नहीं माना जाता है।
जूते चप्पल के लिये आप अपने घर की देहरी के थोड़ी दूर या आंगन में लकड़ी की छोटी अलमारी रखी जा सकती है। मान्यता है कि देहरी  को जितना पवित्र रखा जायेगा उतनी ही घर में बरकत होने के साथ लक्ष्मी का आगमन बना रहेगा।
जूते-चप्पल घर के बाहर या घर के अंदर ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां से गंदगी पूरे घर में न फैले। घर के बाहर भी जूते-चप्पलों को व्यवस्थित ढंग से ही रखा जाना चाहिए। बेतरतीब रखे गए जूते-चप्पल वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं। अत: इससे बचना चाहिए। यदि घर में चप्पल पहनना ही पड़े तो घर के अंदर की चप्पल दूसरी रखें, जिसे बाहर पहनकर न जाएं।

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