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हर व्यक्ति के जीवन के ये दो सुख उसके लिए स्वर्ग होते हैं, जानिए चाणक्य नीति

चाणक्य के अनुसार सुख और दुख सभी इसी धरती पर है. इसी प्रकार से स्वर्ग और नरक भी पृथ्वी पर ही हैं. चाणक्य ने अपना संपूर्ण जीवन लोगों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था. चाणक्य का संबंध विश्व के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय तक्षशिला से था. जिसकी ख्याति उस दौर में संपूर्ण विश्व में थी. चाणक्य ने इसी विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और बाद में वे इसी तक्षशिला विश्वद्यिालय के आचार्य भी बनें. चाणक्य की विशेष बाते ये है कि वे योग्य शिक्षक होने के साथ साथ कूटनीति शास्त्र के भी मर्मज्ञ थे. चाणक्य को कौटिल्ये नाम से भी जाना जाता है.

चाणक्य की चाणक्य नीति मनुष्य को एक जिम्मेदार और श्रेष्ठ नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करती है. यही कारण है इतने साल बीत जाने के बाद भी चाणक्य नीति की लोकप्रियता कायम है. चाणक्य नीति की शिक्षाएं जीवन के हर मोड पर काम आती हैं. चाणक्य की शिक्षाएं व्यक्ति को जीवन में किन चीजों को अपनाना चाहिए और किन चीजों का त्याग करना चाहिए इस पर भी प्रकाश डालती हैं.

ऐसा पुत्र और जीवनसाथी जिनके पास है वे कभी दुखी नहीं होते हैं

चाणक्य के अनुसार स्वर्ग की कामना व्यर्थ है. चाणक्य की मानें तो पुत्र आज्ञाकारी, पत्नी वेदों के अनुसार जीवन जीने वाली और अपने वैभव से जो संतुष्ट है उसके लिए स्वर्ग यहीं है. चाणक्य की इस बात का मर्म ये है कि जिसका पुत्र आज्ञाकारी होता है. उसका जीवन धन्य हो जाता है. वहीं पत्नी अगर वेदों को पढ़ती है, और वेदों की शिक्षाओं पर अमल करती है वहां सुख, शांति और समृद्धि स्थाई होती है. चाणक्य कहते हैं कि इसी प्रकार जब अपने कार्यों और उपलब्धियों से संतुष्ट होता है उसका जीवन दुख और कष्टों से पूरी तरह से मुक्त होता है. जिसके पास ये सुख है उसके लिए यह धरती ही स्वर्ग के समान है. अन्य स्वर्ग की कामना उसके लिए व्यर्थ है.

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