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हनुमान जी के जीवित होने के 5 पुख्ता सबूत, जो कभी किसी ने आपको नहीं बताया होंगे आइए जाने

हनुमान (संस्कृत: हनुमान्, आंजनेय और मारुति भी) परमेश्वर की भक्ति (हिंदू धर्म में भगवान की भक्ति) की सबसे लोकप्रिय अवधारणाओं और भारतीय महाकाव्य रामायण में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में प्रधान हैं। वह कुछ विचारों के अनुसार भगवान शिवजी के ११वें रुद्रावतार, सबसे बलवान और बुद्धिमान माने जाते हैं।[1] रामायण के अनुसार वे जानकी के अत्यधिक प्रिय हैं। इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं। हनुमान जी का अवतार भगवान राम की सहायता के लिये हुआ।
जय श्री राम मित्रों रामायण में यह लिखा हुआ है की माता सीता ने हनुमान जी को कलयुग तक अमर रहने का वरदान दिया था और यह भी वरदान दिया था की वो एक ही समय पर अनेकों जगह पर हनुमानजी उपस्थित रह सकते हैं| ऐसा माना जाता है के धरती पर जहाँ भी राम नाम का सुमिरन किया जाता है वहां वीर बजरंग वली पहुँच जाते हैं फिर चाहे भेष बदलकर ही पहुंचें लेकिन पहुँच जाते हैं| आज हम ऐसे सबूत लेकर आये हैं जिनसे यह 100 प्रतिशत साबित हो जाएगा की हाँ हुनमान जी जीवित हैं और धरती पर ही कहीं न कहीं विचरण कर रहे हैं| इसके साथ साथ यह भी साबित करेंगे की हनुमानहनुमान जी के जीवित होने के ये हैं 5 पुख्ता सबूत, जानकर होश उड़ जाएँगे आपके जी कोई बन्दर नहीं हैं यह सही ज्ञान की कमी के कारण सभी ने मान लिए हैं इसको बदलना होगा और सभी को अपने धर्म की सही जानकारी देनी होगी इसीलिए इस लेख को पूरा जरूर पड़ें और अपने सवाल कमेंट में जरूरलिखें|
हनुमान जी को बन्दर कहा जाता हैं सबसे पहले आप जान लें की वानर का मतलब बन्दर नहीं होता है वानर का अर्थ होता है वन में विचरण करने वाला यानी की जो जंगल में रहता है| वैज्ञानिकों ने भी ऐसी प्रजातियों के बारे में रिसर्च की है जिनकी शारीरिक बनावट बिलकुल हनुमान जी जैसी या रामायण में दर्शाये गए वानरों के जैसी थी| वैज्ञानिकों के मुताविक इस प्रजाति के लोग दक्षिण भारत में और श्रीलंका के जंगलों में रहते थे अब ये प्रजाति विलुप्त हो चुकी हैं| वानर कुल के लोगों के पास सुपर पवार होती थी और इनका शरीर एक पहलवान के समान होता था और हनुमान जी का जन्म इसी वानर कुल में हुआ था हाँ यह मान सकते हैं की वानर कुल के लोगों के फेस की बनावट बन्दर के समान होती थी लेकिन वह बन्दर नहीं थे इसलिए अगर कोई अगली बार हनुमान जी को बन्दर कहे भले ही मजाक में या उसे पता न हो तो आप ये लेख जरूर भेज देना |
अब बात करते हैं हनुमानजी के चिरंजीवी होने के सबूतों के बारे में-
1.त्रेता युग में भगवान श्रीराम के साथ थे हनुमान जी
भगवान श्री राम का जन्म त्रेता युग में, रामायण इसी युग में घटित हुई थी हनुमान जी का जन्म भी इसी युग में वानर कुल में हुआ था| रामायण के बारे में थोड़ा बहुत तो आपको पता ही होगा के कैसे श्रीराम ने हनुमान जी और वानर सेना की मदद से रावण का अंत किया उसके बाद क्या हुआ कोई नहीं जानता| यह आपको हम बताएंगे| लंका विजय के बाद श्रीराम ने कई वर्षों तक अयोध्या पर राज किया हनुमान जी की राम भक्ति देखकर माता सीता ने उन्हें अमरता का वरदान दे दिया| धीरे धीरे त्रेता युग की समाप्ति हो गई और भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम जी अपने वैकुण्ठ लोक वापस लौट गए यानी की श्रीराम ने अपना शरीर त्याग दिया इस बात से हनुमान जी बहुत दुखी हुए और वो भी दक्षिण भारत की ओर निकल गए|
उन्होंने निश्चय किया की वो अब जंगलों में ही रहेंगे उनकी यता के दौरान वो एक कबीले में कुछ दिनों के लिए रुके थे| इस कबीले के लोगों ने हनुमानजी की बहुत सेवा की उनकी सेवा भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमानजी ने उन्हें आत्म ज्ञान दिया| आत्म ज्ञान वह दिव्य ज्ञान है जिससे आपको अपने वर्तमान, भविष्य और भूतकाल सबका पता चल जाता है और ये भी पता चल जाता है की अगले जन्म में आप कहाँ होओगे और पिछले जन्म में आप कहाँ थे| उस कबीले के लोगों ने हनुमान जी यह आग्रह किया की वो समय समय पर वापस लौटकर उनके आने वाली पीढ़ी को भी यह आत्म ज्ञान दें|
हनुमान जी ने इस कबीले के लोगों के वचन दिया की वे हर 41 साल में एक बार आत्म ज्ञान देने आएंगे| बहुत सालों तक इस कबीले के बारे में किसी को पता ही नहीं था लेकिन कुछ सालों पहले विदेशी वैज्ञानिकों ने इस कबीले को ढूंढ निकला| उस कबीले के लोगों ने बताया की हर 41 साल के बाद एक वानर रूपी आदमी हमारे कबीले में आता है| उस कबीले के पास से संस्कृत भाषा में लिखे ताम्रपत्र भी मिले हैं|पूरी दुनियां से कटकर रहने के बावजूद भी उस कबीले के लोगों का रहन सहन, संस्कृति और बुद्धि किसी संत से कम नहीं| कबीले के लोगों ने यह भी बताया की वो उनके पूर्वजों को एक मंत्र दिया था और कहा था की यदि तुम इस मंत्र का जाप करोगे तो मैं रौशनी से भी तेज गति से प्रकट हो जाऊंगा|
2. द्वापर युग के महाभारत में अर्जुन की मदद करी थी
त्रेता युग में हुई थी रामायण उसके बाद आया द्वापर युग जिसमें हुई थी महाभारत| महाभारत ग्रन्थ को ध्यान से पढ़ने पर पता चलता है की हनुमानजी महाभारत की समय पर भी थे| महाभारत ग्रन्थ में कई बार हनुमानजी का जिक्र किया गया है| द्वापर युग में हनुमान जी ने एक बार अर्जुन का घमंड तोडा था और एक बार भीम का घमंड तोडा था| इन दोनों कहानियों का उल्लेख महाभारत में दर्ज हैं|
महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण के कहने पर हनुमानजी ने अप्रत्यक्ष रूप से अर्जुन के रथ पर विराजमान रहकर पूरे युद्ध के दौरान अर्जुन की रक्षा की थी अगर हनुमान जी अर्जुन की रक्षा नहीं करते तो कर्ण उन्हें कब का मार देता|
3. कलयुग में तुलसीदास जी को दिए दर्शन
द्वापर युग के समाप्त होने पर आया कल युग और इस युग में भी हनुमानजी के जीवित होने के पुख्ता सबूत मिलते हैं| सन 1600 में तुलसीदास जी के समय हनुमानजी ने उन्हें साक्षात् दर्शन दिए थे उन्हें रामायण लिखने के लिए प्रेरित किया था| तुलसीदास जी एक अज्ञानी मनुष्य थे फिर उन्होंने रामायण जैसा ग्रन्थ कैसे लिखा यह एक सोचने वाली बात है| दरअसल हनुमानजी ने उन्हें भी दिव्य ज्ञान प्रदान किया था जिससे वे उस काविल बन पाए और उन्होंने रामायण जैसा महा ग्रन्थ लिख डाला| नहीं यह एक सोचने वाली बात है| दरअसल हनुमानजी ने उन्हें भी दिव्य ज्ञान प्रदान किया था जिससे वे उस काविल बन पाए और उन्होंने रामायण जैसा महा ग्रन्थ लिख डाला| नहीं तो उन्हें कैसे पता चला की त्रेता युग में क्या हुआ था|
इसी प्रकार बहुत से संतों ने हनुमानजी के दर्शन का दवा किया है जैसे सत्य साईं बाबा, स्वामी रामदास, नीमकरोडी बाबा , राघवेंद्र स्वामी और ऋषि माधवाचार्य| ये सभी संत बहुत ही सिद्ध हैं और इनकी शक्तियां देखकर देश विदेश के लोग उनसे प्रभावित हुए हैं| नीमकरोड़ी बाड़ा के फॉलोवर में सबसे बड़े नाम फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग का है|
4.अमेरिका में भी होती है हनुमान जी की पूजा
ये तो हो गई भारत की बात अब जरा अमेरिका की बात करते हैं अमेरिका में लोगों ने बहुत बार मानव रुपी एक विशालकाय जीव को देखा है जिसे उन्होंने बिग फ़ीट का नाम दिया है और अमेरिका में माया सभ्यता को जो हजारों साल पुराणी है को एक मंकी गॉड की पूजा करती हैं इस मंकी गॉड की प्रतिमा एकदम हनुमानजी जैसी ही लगती है|
5. भारत में हैं हनुमान जी के पैरों के निशान
हमारे देश में कई जगह बड़े बड़े पैरों के निशान आज भी मौजूद हैं जो किसी इंसान के तो बिलकुल भी नहीं हो सकते है तो क्या ये हनुमान जी के पैरों के निशान हैं आप अपने मन की बात कमेंट में जरूर बताएं|
दोस्तों एक लेख को पूरा पढ़ने के बाद आपको यकीन हो गया होगा की हनुमानजी आज भी धरती पर ही हैं और इसी कारण से माना जाता है की कलयुग में हनुमानजी सबसे ज्यादा सुनने वाले देवता हैं| अगर सच्ची श्रद्धा से उन्हें पूजा जाए तो वह भक्त की रक्षा करने क्षण में प्रकट हो जाते हैं|

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