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सभी को इन पांच स्थानों से दूर रहना चाहिए, नहीं तो आर्थिक तंगी के साथ घर बर्बादी की तरफ चल पड़ेगा

आर्थिक समस्या का कथन है कि किसी भी अर्थव्यवस्था के सीमित संसाधन मानव की सभी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकते। इसका मानना है कि मानव की आवश्यकताएँ असीम हैं, जबकि उनको पूरा करने के साधन कम होते हैं। ‘आर्थिक समस्या को ही ‘मूलभूत आर्थिक समस्या’ भी कहते हैं।
व्यक्ति को महत्व और उसके गुण प्रदान करते हैं वह जिन पदों पर काम करता है सिर्फ उससे कुछ नहीं होता। क्या आप एक कौवे को गरुड़ कहेंगे यदि भाइयों को ऊंची इमारत के छत पर जाकर बैठता है। गुणों से रहित है लेकिन जिसकी लोग सराहना करते हैं वह इस दुनिया में काबिल माना जाता है लेकिन जो आदमी खुद की ही ढींगे हांकता था और वह अपने आपको दूसरों की नजरों में गिराता है भले ही वह स्वर्ग का राजा इंद्र हो। यदि एक विवेक संपन्न व्यक्ति अच्छे गुणों का परिचय देता है तो उसके गुणों की आवक और रत्न जैसी मान्यता मिलती है एक ऐसा रतन जो प्रज्वलित है और सोने के अलंकार में मरने पर और चमकता है। वह व्यक्ति के सर्वगुण संपन्न है। व्यक्तिअपने आप को सिद्ध नहीं कर सकता जब तक उसे समुचित संरक्षण नहीं मिल जाता उसी प्रकार जैसे मणि तब तक नहीं निखरता जब तक उसे आभूषण में ना सजाया जाए। मुझे वह दौलत नहीं चाहिए जिसके लिए कठोर यातना देनी पड़े सदाचार का त्याग करना पड़े या अपने शत्रु की चापलूसी करनी पड़े।
सभी परोपकार और तप तात्कालिक लाभ देते हैं लेकिन सुपात्र को जो दान दिया जाता है और सभी जीवो को जो संरक्षण प्रदान किया जाता है उसका पुण्य कर्म कभी नष्ट नहीं होता। घास का तिनका हल्का है कपास उससे भी हल्का है भिखारी तो अनंत हल्का है फिर हवा का झोंका उसे उड़ाते क्यों नहीं ले जाता डरता है कहीं बा भीख ना मांग ले। बेइज्जत होकर जीने से अच्छा है कि मर जाएं मरने में एक षंड का दुख होता है पर बेइज्जत होकर जीने में हर रोज दुख उठाना पड़ता है। सभी जीव मीठे वचनों से आनंदीत होते हैं इसलिए हम सबसे मीठे बचन कहे, मीठे वचनों की कोई कमी नहीं। इस दुनिया के वृक्ष को दो मीठे फल लगे हैं मधुर वचन और दूसरा सत्संग पहले के जन्मों की अच्छी आदतें जैसे दान विद्यार्जन और तप इस जन्म में भी चलती रहती है क्योंकि सभी जन्म एक श्रंखला से जुड़े होते हैं। ज्ञान किताबों में सिमट गया है और जिसने अपनी दौलत दूसरों के सुपुर्द कर दी है बस जरूरत पड़ने पर न अपना ज्ञान इस्तेमाल कर सकता है और ना अपनी दौलत। विद्वान जिसने असंख्य किताबों का अध्ययन बिना सद्गुरु के आशीर्वाद से कर लिया वह विद्वानों की सभा में एक सच्चे विद्वान के रूप में नहीं चमकता है। उसी प्रकार जिस प्रकार एक नाजायज औलाद को दुनिया में कोई प्रतिष्ठा हासिल नहीं होती हमें दूसरों से जो मदद प्राप्त हुई है उसे हमें लौटाना चाहिए उसी प्रकार यदि किसी ने हमसे दुष्टता की है तो हमें भी उससे दुष्टता करनी चाहिए ऐसा करने में कोई पाप नहीं है।
वह चीज जो दूर दिखाई देती है जो असंभव दिखाई देती है तथा जो हमारी पहुंच से बाहर दिखाई देती है वो भी आसानी से हासिल हो सकती है यदि हम तप करते हैं क्योंकि तप से ऊपर कुछ नहीं। लोभ से बड़ा दुर्गुण क्या हो सकता है और निंदा से बड़ा पाप क्या है जो सत्य में प्रस्थापित है उसे तप करने की क्या जरूरत है जिसका हृदय शुद्ध है उसे तीर्थयात्रा की क्या जरूरत है स्वभाव अच्छा है तो और किस गुण की ज़रूरत है ? यदि कीर्ति है तो अलंकार की क्या जरूरत है यदि व्यवहार ज्ञान है तो दौलत की क्या जरूरत है और यदि अपमान हुआ है तो मृत्यु से भयंकर नहीं है। समुद्री सभी रत्नों का भंडार है वह शंख का पिता है देवी लक्ष्मी शंख की बहन है लेकिन दर-दर पर भीख मांगने वाले हाथ में शंख लेकर घूमते हैं इससे यह बात सिद्ध होती है कि उसी को मिलेगा जिसने पहले दिया है। जब आदमी में शक्ति नहीं रह जाती तो बसा दो हो जाता है जिसके पास दौलत नहीं होती वह ब्रह्मचारी बन जाता है। औरत बड़ी होती है तो पति के प्रति समर्पित हो जाती है सांप के डांस में विष होता है कीड़े के मुंह में विष होता है बिच्छू के डंक में विश होता है लेकिन दुष्ट व्यक्ति तो पूरा का पूरा विष से भरा हुआ होता है।
जो स्त्री अपने पति की सहमति के बिना व्रत रखती है और उपवास करती है वह उसकी आयु घटाती है वह खुद नरक में जाती है। स्त्री दान देकर उपवास रखकर और पवित्र जल का पान करके पावन नहीं हो सकती पति के चरणों को धोने से और ऐसे जल का पान करने से छूट होती है। एक हाथ की शोभा गहनों से नहीं दान देने से है चंदन का लेप लगाने से नहीं जल से नहाने से निर्मलता आती है एक व्यक्ति भोजन खिलाने से नहीं सम्मान देने से संतुष्ट होता है। मुक्ति खुद को सजाने से नहीं होती आध्यात्मिक ज्ञान को जगाने से होती है। औरत के कारण आदमी की शक्ति खो जाती है और दूध से वापस आती है जिसमें सभी जीवो के प्रति परोपकार की भावना है वह सभी संकटों पर मात करता है और उसे हर कदम पर सभी प्रकार की संपन्नता प्राप्त होती है।
वह इंद्र के राज्य में जाकर क्या सुख हो गए क्या पत्नी प्रेम भाव रखने वाली और सदाचारी है जिसके पास में संपत्ति है इसका पुत्र सदाचारी और अच्छे गुण वाला है तथा जिसको अपने पुत्र द्वारा पौत्र हुए हैं मनुष्यों में और निम्न स्तर के प्राणियों में खाना सोना घबराना और गमन करना समान है मनुष्य अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ है तो विवेक ज्ञान की बदौलत मनुष्यों में ज्ञान नहीं व पशु के समान है यदि मदमस्त हाथी अपने माथे से टपकने वाले रस को पीने वाले भंवरों को कान हिलाकर उड़ा देता है तो भंवरों का कुछ नहीं जाता कमल से भरे हुए तालाब की और खुशी से चले जाते हैं लेकिन हाथी के माथे का श्रंगार कम हो जाता है।
आठो कभी दूसरों का दुख नहीं समझ सकते ,पहला राजा दूसरा वैश्या तीसरा यमराज चौथा अग्नि पांचवा चोर छटा छोटा छोटा बच्चा सातवां भिखारी और आठवां कर वसूल करने वाला व्यक्ति। मुर्ख छात्रों को पढ़ाने तथा दुष्ट स्त्री के पालन पोषण से और दुखियों के साथ संबंध रखने से बुद्धिमान व्यक्ति भी दुखी होता है अर्थात यह है कि मूर्ख शिष्य को कभी उपदेश नहीं देना चाहिए। पतित आचरण करने वाली स्त्री की संगति करना तथा दुखी मनुष्यों के साथ करने से विद्वान तथा भले व्यक्ति को दुख ही उठाना पड़ता है।
स्त्री करने वाला मित्र पलट कर तीखा जवाब देने वाला नौकर तथा जिस घर में सांप रहता हो उस घर में निवास करने वाले ग्रह स्वामी की मौत में संशय ना करें निश्चित ही मृत्यु को प्राप्त होता है। विप्पति के समय काम आने वाले धन की रक्षा करें स्त्री की रक्षा करें और अपनी रक्षा धन और स्त्री से सदैव करें। आपत्ति से बचने के लिए धन की रक्षा करें क्योंकि पता नहीं कब आपदा आ जाए लक्ष्मी तो चंचल है संचय किया गया धन कभी भी नष्ट हो सकता है जिस देश में आप का सम्मान नहीं आजीविका का साधन नहीं बंधु बांधव अर्थात परिवार नहीं और विद्या प्राप्त करने के साधन नहीं वहां कभी भी रहना नहीं चाहिए। जहां धनी वैदिक ब्राह्मण राजा नदी और वध्य, ये पांच ना हो तो वहां 1 दिन भी नहीं रहना चाहिए। अर्थात यह है कि जिस जगह पर इन पांचों का अभाव हो वहां मनुष्य को 1 दिन भी डरना नहीं चाहिए जहां जीविका भाई लज्जा चतुराई और त्याग की भावना यह पांचों ना हो वहां के लोगों का साथ कभी ना करें नौकरों को बाहर भेजने पर बंधुओं को संकट के समय तक दोस्त को विपत्ति में और अपनी स्त्री को धन के नष्ट होने पर पढ़कर चाहिए बीमारी में विपत्ति काल में काल के समय दुश्मनों से दुख पाने आक्रमण होने पर राज दरबार में और शमशान भूमि में जो साथ रहता है।
वही सच्चा भाई अथवा बंधु है जो अपने निश्चित कर मौत व वस्तुओं का त्याग करके अनिश्चित की करता है उसका निश्चित लक्ष्य तो नष्ट होता ही है साथ ही निश्चित लक्ष्य भी नष्ट हो जाता है। मूर्ख व्यक्ति को अच्छे कुल में जन्म लेने वाली कुरूप कन्या से विवाह कर लेना चाहिए अच्छे रूप वाली न्यूज़ कल की कन्या से विवाह नहीं करना चाहिए क्योंकि विवाह संबंध सामान कोई में ही श्रेष्ठ होता है। लंबे नाखून वाले हिंसक पशुओं नदियों बड़े-बड़े सिंह वाले पशु शस्त्र धारियों स्त्रियों और राज परिवारों का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। विश्व से अमृत अशुद्ध स्थान से सोना नीच कुल वाले से विद्या और दुष्ट स्वभाव वाले पुल की गुनी स्त्री को ग्रहण करना अनुचित नहीं होता है। तो दोस्तों यह थे आचार्य चाणक्य के कुछ बेहद अनमोल विचार।

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