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रावण ने मरते वक्त लक्ष्मण को बताई थी ये बातें, आप भी नहीं जानते होंगे इन बातों को

राजा रावण मंडावी रामायण का एक प्रमुख प्रतिचरित्र है। रावण लंका का राजा था। वह अपने दस सिरों के कारण भी जाना जाता था, जिसके कारण उसका नाम दशानन (दश = दस + आनन = मुख) भी था परंतु आदिवासी सभ्यता के अनुसार दशानन मतलब राजा। किसी भी कृति के लिये नायक के साथ ही सशक्त खलनायक का होना अति आवश्यक है। किंचित मान्यतानुसार रावण में अनेक गुण भी थे।

रावण को नीति, राजनीति और शक्ति का पंडित माना जाता था और श्रीराम भी उनकी इस विद्या का सम्मान करते थे। इसलिए जब रावण मरणासन्न अवस्था में था, तब श्री राम ने लक्ष्मण जी को रावण के पास जाने और उससे शिक्षा प्राप्त करने के लिए कहा था। तब लाक्स्मन जी वहा गए और रावण ने उनको ज्ञान दिया। आज हम आपको रावण की उन्हीं ज्ञान की बातों को बताने जा रहे हैं जो आपके जीवन के लिए भी फायदेमंद हैं।
1. पहली बात जो रावण ने लक्ष्मण को बताई वह ये थी कि शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना और अशुभ को जितना टाल सकते हो टाल देना चाहिए यानी शुभस्य शीघ्रम्। मैंने श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देरी कर दी, इसी कारण मेरी यह हालत हुई।
2. दूसरी बात यह कि अपने प्रतिद्वंद्वी, अपने शत्रु को कभी अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए, मैं यह भूल कर गया। मैंने जिन्हें साधारण वानर और भालू समझा उन्होंने मेरी पूरी सेना को नष्ट कर दिया। मैंने जब ब्रह्माजी से अमरता का वरदान मांगा था तब मनुष्य और वानर के अतिरिक्त कोई मेरा वध न कर सके ऐसा कहा था क्योंकि मैं मनुष्य और वानर को तुच्छ समझता था। यहाँ मेरी गलती हुई।
3. रावण ने लक्ष्मण को तीसरी और अंतिम बात ये बताई कि अपने जीवन का कोई राज हो तो उसे किसी को भी नहीं बताना चाहिए। यहां भी मैं चूक गया क्योंकि विभीषण मेरी मृत्यु का राज जानता था। ये मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती थी।

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