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पत्नी को परेशान होते देखा तो एक शख्स बन गया दशरथ मांझी और खोद डाला कुआं, खूब हुई प्रशंसा…l

दरअसल भरत सिंह के गांव में पानी की व्यवस्था ना होने की वजह से उनकी पत्नी सुशीला बाई को दूर जगह जाकर हैडपंप से पानी लाना पड़ता था। अक्सर हैडपंप खराब रहता था, जिसकी वजह से सुशीला को परेशानी झेलनी पड़ती थी। पत्नी को दुखी देखकर भरत सिंह भी परेशान हो जाया करते थे। एक दिन उन्होंने फैसला लिया कि वह पानी की समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे।

गांव में ही कुंआ खोदने का काम शुरू किया

यह सोचकर भरत सिंह ने अपने घर के पास गांव में ही कुंआ खोदने का निर्णय लिया। ठीक उसी तरह से जिस तरह से दशरथ मांझी ने अपनी पत्नी के लिए पहाड़ खोदकर सडक़ बना दी थी। भरत ने भी मांझी के रास्ते पर चलते हुए एक दिन फावड़ा और गेती उठाई और कुंआ खोदने का काम शुरू कर दिया। हालांकि उसकी इस हरकत को उनकी पत्नी ने नामुमकिन समझते हुए उसका मजाक भी उड़ाया था। मगर उन्होंने इस काम को करने की ठान ली थी। इसके चलते ही भरत सिंह ने 30 फुट गहरा और चार फीट चौड़ा कुँआ खोद दिया।

कलेक्टर ने किया सलाम

कुंआ खोदने की जानकारी मिलते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। बाद में भरत सिंह ने कुंए को पक्का करने का काम भी कर दिया। 46 साल के भरत सिंह के इस काम की जानकारी जब जिले के अधिकारियों को हुई तो वह भी इससे बहुत खुश हुए। जिले के कलेक्टर पुरूषोत्तम कुमार ने भरत सिंह के हौंसले व जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि ये बड़ा काम था जो उसने कर दिखाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन दोनों को तमाम सरकारी सुविधाएं भी दिलवाई जाएंगी। पीएम आवास योजना के तहत उन्हें घर दिलवाने का काम भी किया जाएगा।

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