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पढ़ाई में जिन लोगों का नहीं लगता है मन वह लोग बसंत पंचमी के दिन करें ये उपाय, अगले ही दिन से मिलने लगेगी सफलताएं

वसंत पञ्चमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू का त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करते हैं। प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था।
प्राचीनकाल में बसंत पंचमी के दिन से ही बच्चों की शिक्षा आरंभ की जाती थी। आज भी यह परंपरा है। मां सरस्वती ज्ञान-विज्ञान, कला, संगीत और शिल्प की देवी हैं। इस दिन बच्चे मां सरस्वती की आराधना अवश्य करें। सुबह स्नान कर पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती को पीले और सफेद पुष्प अर्पित करें।
अगर बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता हो तो बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को हरे फल आर्पित करें। मां सरस्वती का चित्र अध्ययन कक्ष में रखें। इस दिन बच्चे की जीभ पर शहद से ॐ बनाना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से बच्चा ज्ञानवान होता है। छह माह पूर्ण कर चुके बच्चों को अन्न का पहला निवाला भी इसी दिन खिलाया जाता है। विद्यार्थी इस दिन अपनी किताबों पर पीला कवर लगाकर उस पर रोली से स्वास्तिक अंकित करें। पूजा करते समय मां सरस्वती की मूर्ति के साथ श्रीगणेश की मूर्ति अवश्य रख लें। किताबें, कलम, वाद्य यंत्र आदि को मां सरस्वती के समक्ष रखें। माता-पिता बच्चों को गोद में लेकर बैठें। बच्चों के हाथ से भगवान श्री गणेश को फूल अर्पित कर अक्षर अभ्यास कराएं। सरस्वती पूजन के पश्चात पूजा में प्रयुक्त हल्दी को कपड़े में बांधकर बच्चे के हाथ पर बांध दें। हलवा या केसर युक्त खीर का प्रसाद अर्पित करें।

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