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इस सरगना और मोस्ट वांटेड का नाम सुनते ही अंग्रेजों की रूह कांपने लगती थी, आप भी नहीं जानते होंगे आइए जाने

भूपत सिंह चौहाण : भूपतसिंह के कहर से जहां राजे-रजवाड़े और अंग्रेज कांपा करते थे, वहीं गरीबों के दिल में उसके लिए सर्वोच्च स्थान था। यही कारण था कि उसे ‘इंडियन रॉबिनहुड’ कहा जाता था जिसे कभी पुलिस पकड़ नहीं पाई। भूपत की कई क्रूरताभरी कहानियां हैं तो कई उसकी शौर्यगाथाओं और गरीबों के प्रति उसके प्रेम का गुणगान करती हुई भी हैं। गुजरात के काठियावाड़ में रहने वाले भूपत सिंह को अंतिम समय तक न तो किसी राजा की सेना पकड़ सकी और न ही ब्रितानी फौजें। अंतत: कई अंग्रेजों को मौत की नींद सुला देने वाले भूपत सिंह के बिना ही अंग्रेजों को वापस इंग्लैंड लौटना पड़ा। अंग्रेजी शासन के अंत के बाद इधर भारत सरकार भी भूपत को कभी पकड़ नहीं सकी। भूपत सिंह राज्य का धाकड़ खिलाड़ी था। दौड़, घुड़दौड़, गोला फेंक में कोई उसका कोई सानी नहीं था। लेकिन उसकी जिंदगी में ऐसी घटनाएं हुईं कि उसने हथियार उठा लिए। दरअसल, भूपत के जिगरी दोस्त और पारिवारिक रिश्ते से भाई राणा की बहन के साथ उन लोगों ने बलात्कार किया जिनसे राणा की पुरानी दुश्मनी थी। जब इनसे बदला लेने राणा पहुंचा तो उन लोगों ने राणा पर भी हमला कर दिया। भूपत ने किसी तरह राणा को बचा लिया, लेकिन झूठी शिकायतों के चलते वह खुद इस मामले में फंस गया और उसे काल-कोठरी में डाल दिया गया। बस, यहीं से खिलाड़ी भूपत मर गया और डाकू भूपत पैदा हो गया। भूपत ने जेल से फरार होते ही राजाओं और अंग्रेजों के खिलाफ जंग ही छेड़ दी थी। 1947 की आजादी के बाद पूरे देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे। इस दौरान भूपत और उसके साथियों ने अपने दम पर सैकड़ों महिलाओं की आबरू बचाई। भूपत सिंह ने सैकड़ों बार पुलिस को चकमा दिया। देश आजाद होने के बाद 1948 में भूपत के कारनामे चरम पर पहुंच गए थे और पुलिस भूपत को रोकने और पकड़ने में पूरी तरह नाकाम हो गई थी। 60 के दशक में डाकू भूपत सिंह अपने तीन खास साथियों के साथ देश छोड़कर गुजरात के सरहदी रास्ते कच्छ से पाकिस्तान जा पहुंचा। कुछ समय बाद उसने वापस भारत आने का इरादा किया, लेकिन भारत-पाक पर मचे घमासान के चलते उसके लिए यह मुमकिन नहीं हुआ। अंतत: पाकिस्तान में उसने मुस्लिम धर्म अंगीकार कर लिया और अब पाकिस्तान में उसे अमीन यूसुफ के नाम से जाता जाता है। धर्म-परिवर्तन के बाद उसने मुस्लिम लड़की से निकाह किया। उसके 4 बेटे और 2 बेटियां हुईं। हालांकि उसने व उसके अन्य साथियों ने भारत आने की कई कोशिशें कीं, लेकिन उसकी यह इच्छा पूर्ण नहीं हो सकी और पाकिस्तान की धरती पर ही 2006 में उसकी मौत हो गई। उसे मुस्लिम रीति-रिवाजों से दफना दिया गया।

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