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इस देव के श्राप से हुआ था मौत के देवता का जन्म, आपने भी नहीं सुनी होगी ऐसी बात आइए जाने

यमराज हिन्दू धर्म के अनुसार मृत्यु के देवता हैं। इनका उल्लेख वेद में भी आता है। इनकी जुड़वां बहन यमुना (यमी) है। यमराज, महिषवाहन (भैंसे पर सवार) दण्डधर हैं। वे जीवों के शुभाशुभ कर्मों के निर्णायक हैं। वे परम भागवत, बारह भागवताचार्यों में हैं। यमराज दक्षिण दिशा के दिक् पाल कहे जाते हैं और आजकल मृत्यु के देवता माने जाते हैं।
मार्कडेयपुरण धर्मग्रंथ में लिखा है की जब विश्वकर्मा की कन्या संज्ञा ने अपने पति सूर्य को देखकर डर से आँखें बंद कर ली। तब सूर्य देव ने क्रुद्ध होकर उसे श्राप दिया कि जाओ तुम्हें जो पुत्र होगा। वह लोगों का संयमन करने वाला (उनके प्राण लेनेवाला) होगा। पुत्र के रूप में उन्हें यम पैदा हुए।
यमराज हिन्दू धर्म के अनुसार मृत्यु के देवता हैं। इनका उल्लेख वेद में भी आता है। यमराज, महिषवाहन (भैंसे पर सवार) दण्डधर हैं। वे जीवों के शुभाशुभ कर्मों के निर्णायक हैं। वे परम भागवत, बारह भागवताचार्यों में हैं। यमराज दक्षिण दिशा के दिक् पाल कहे जाते हैं और आजकल मृत्यु के देवता माने जाते हैं।
हिन्दू धर्म का मानना है कि मनुष्य की म्रत्यु के बाद सब से पहले आत्मा यमलोक में जाती है और वहाँ यमराज के सामने उपस्थित किया जाता है। वही उसकी शुभ और अशुभ कृत्यों का विचार करके उसे स्वर्ग या नरक में भेजते हैं। ये धर्मपूर्वक विचार करते हैं, इसीलिये ‘धर्मराज’ भी कहलाते हैं। यह भी माना जाता है कि मृत्यु के समय यम के दूत ही आत्मा को लेने के लिये आते हैं।

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