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आखिर क्यों अंदर से कैलाश पर्वत है पूर्ण रूप से खोखला, आइए जानें हैरान कर देने वाली रहस्य

कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित एक पर्वत श्रेणी है। इसके पश्चिम तथा दक्षिण में मानसरोवर तथा राक्षसताल झील हैं। यहां से कई महत्वपूर्ण नदियां निकलतीं हैं – ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलुज इत्यादि। हिन्दू सनातन धर्म में इसे पवित्र माना गया है।
कैलाश पर्वत देखने में कितना सुंदर है उतना ही रहस्यमई भी है. एक पर्वत के साथ कई रहस्य जुड़े हुए हैं! एक रहस्य तो यह है कि आखिर इस पर्वत पर अब तक कोई क्यों नहीं चढ़ पाया. दरअसल कैलाश पर्वत की ऊंचाई 6638 मीटर है और इसके ऊपर पहुंचना असंभव माना जाता है. अब एक थ्योरी सामने आ रही है जिसमें कहा जा रहा है कि हो सकता है कि कैलाश पर्वत अंदर से खोखला हो. पहले भी वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया कि कैलाश पर्वत बहुत ही ज्यादा रेडियोऐक्टिव है. यह रेडियो एक्टिविटी चारों तरफ एकसमान फैली हुई है. ऐसा केवल तभी संभव है जब इसका स्त्रोत इस पर्वत का केंद्र हो.
वैसे भी कैलाश पर्वत को हमारे धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है. वेदों में भी इसकी व्याख्या की गई है कि कैलाश पर्वत पर कोई भी अशुद्ध आत्मा नहीं जा सकती. इस पर शिव का निवास है. वैज्ञानिक यहां तक दावा करते हैं कि कैलाश पर्वत प्राकृतिक नहीं है बल्कि इसमें बनाया गया है. बिल्कुल उसी तरह जिस तरह इजिप्ट के पिरामिड बनाए गए हैं. पिरामिड भी अंदर से खोखला हैं और उनके अंदर देवताओं की मूर्तियां भी रखी गई है.
कैलाश पर्वत इससे भी लाखों साल पुराना है और यह समय के साथ सख्त हो गया है. अगर हम बात करें कैलाश पर्वत की स्थिति की तो यह उत्तरी ध्रुव से 6666 किलोमीटर दूर है और दक्षिणी ध्रुव से 13332 किलोमीटर जो कि बिल्कुल दुगना है उत्तरी ध्रुव से, है ना कमाल की बात. हमारे वेदों में भी कैलाश पर्वत को धरती का केंद्र कहा गया है और वैज्ञानिक भी अब इसकी पुष्टि कर रहे हैं.

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