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आखिर क्या है इस मंदिर में बलि देने के बाद भी नहीं मरता बकरा, आइए जाने हैरान कर देने वाला रहस्य

बिहार के कैमूर जिले में भभुआ नाम के एक गांव में मौजूद है मुंडेश्वरी देवी का एक बेहद चमत्कारी और रहस्य में मंदिर.करीब 1900 साल पुराना यह मंदिर यहां होने वाली बेहद विचित्र घटना के लिए मशहूर है.दरअसल इस मंदिर में पशु बलि की परंपरा है.श्रद्धालु इस मंदिर में देवी को प्रसन्न करने के लिए बकरों की बलि देते हैं लेकिन इस मंदिर में चढ़ाए जाने वाली बली में ना तो किसी हथियार की जरूरत पड़ती है और ना ही एक भी बूंद खून इस मंदिर की मिट्टी पर गिरता है.यहां दी जाने वाली भली में इस्तेमाल किया जाता है कुछ फूल की पत्तियों का और चंद चावलों के दानों का.भक्त अपने जानवरों के साथ मंदिर में प्रवेश करते हैं और यहां के पुजारी उन जानवरों को देवी की मूर्ति के सामने लेटा देते हैं और फिर मूर्ति के पास से पुजारी एक फूल और कुछ चावलों के दानों को उठाकर जानवर के शरीर पर रख देते हैं.इसके कुछ ही क्षणों बाद जानवर बिल्कुल अचेत अवस्था में चला जाता है.उसके शरीर में किसी भी तरह की कोई हरकत नहीं होती जबकि अमूमन ऐसा देखा जाता है कि अगर किसी जानवर को इस तरह से लेता दिया जाता है तो वह बेहद बेचैन हो जाते हैं और इधर-उधर भागने की कोशिश करने लगते हैं लेकिन मुंडेश्वरी मंदिर में ऐसा कुछ भी नहीं होता.फिर पुजारी एक बार फिर मूर्ति के पास आता है और जानवर के मृत शरीर पर एक फूल और कुछ चावल फेंकता है और वह जानवर फिर से उठ खड़ा होता है.चमत्कार देखने वालों की आंखें फटी की फटी रह जाती हैं इस मंदिर में होने वाली इस अद्भुत घटना को कई एक्सपर्ट्स ने भी देखा है लेकिन आज तक कोई भी इस घटना का कोई साइंटिफिक कारण नहीं दे सका है।

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