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अजमेर शरीफ की हवा में तैरते हुए जादुई पत्थर का रहस्य, आइए जाने रहस्य हैरान कर देने वाला

दरगाह अजमेर शरीफ़ का मुख्य द्वार निज़ाम गेट कहलाता है क्योंकि इसका निर्माण 1911 में हैदराबाद स्टेट के उस समय के निज़ाम, मीर उस्मान अली ख़ाँ ने करवाया था। उसके बाद मुग़ल सम्राट शाह जहाँ द्वारा खड़ा किया गया शाहजहानी दरवाज़ा आता है। अंत में सुल्तान महमूद ख़िल्जी द्वारा बनवाया गया बुलन्द दरवाज़ा आता है, जिसपर हर वर्ष ख़्वाजा चिश्ती के उर्स के अवसर पर झंडा चढ़ाकर समारोह आरम्भ किया जाता है। ध्यान रहे कि यह दरवाज़ा फ़तेहपुर सीकरी के क़िले के बुलन्द दरवाज़े से बिलकुल भिन्न है। सन् 2015 में ख़्वाजा चिश्ती का 800वाँ उर्स मनाया गया था।
सत्य है कि विशेष ज्ञान को ही विज्ञान कहा जाता है। जिन सवालों का जवाब हमारे आज के विज्ञान में नहीं होता, यह अक्सर धर्म से जुड़े सवाल ही होते हैं। धर्म में जो अच्छा होता है उसे स्वीकार करना चाहिए और वक्त के साथ जहां बदलाव की संभावना होती है उसे सकारात्मक रूप में बदलना भी चाहिए। आज हम बात करेंगे पवित्र अजमेर शरीफ के एक रहस्य के विषय में, जिसे आज तक कोई भी नहीं सुलझा पाया।
हम चाहे तो हर सवाल का जवाब पा सकते हैं, जैसे मौसम क्यों बदलता है ? , हम सांस कैसे लेते हैं ? , ब्रह्मांड से जुड़े अनेकों सवाल और ऐसे अनेकों प्रश्न है जो हमारे मन में आते हैं जिसे हम विज्ञान की कसौटी पर माप कर उसके उत्तर को प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन यह रहस्य थोड़ा अलग है। वैसे तो अजमेर शरीफ के दरगाह पर आने वाले लोगों के लिए यहां की हर चीज पवित्र है और हर चीज उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है।
लेकिन यहीं मौजूद है एक हवा में उड़ने वाला पत्थर, जो सबका ध्यान अपनी और आकर्षित करती है और सब के लिए उत्सुकता का विषय है। इस पत्थर की सबसे दिलचस्प बात यह है की यह बिना किसी सहारे के जमीन से 2 इंच ऊपर उठा हुआ है। यहां कई वैज्ञानिक इस पत्थर पर अनुसंधान करने आते हैं लेकिन आज तक कोई भी इसके पीछे का वास्तविक तर्क देने में सफल नहीं रहा है।
मान्यताओं के अनुसार एक बार ख्वाजा साहब ने अपने मानने वाले एक फरियादी को इस पत्थर से बचाया था। कहा जाता है कि यह पत्थर तेजी से उस फरियादी की ओर बढ़ रहा था, जिसे देखकर उसके होश उड़ गए। फरियादी ने सच्चे मन से ख्वाजा साहब को याद किया। सिर्फ चमत्कार स्वरूप वह पत्थर अपनी जगह पर हवा में ही रुक गया।
अगर खुले मन से देखा जाए,तो हर धर्म में प्रेम ही नजर आएगा। भक्त हो या फरियादी, उसकी आवाज ऊपर वाले के किसी न किसी रूप तक पहुंचे ही जाती है।

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