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अगर कान में घुस जाए चींटी तो तुरंत अपनाएं ये उपाय, आइए जाने

मानव व अन्य स्तनधारी प्राणियों मे कर्ण या कान श्रवण प्रणाली का मुख्य अंग है। कशेरुकी प्राणियों मे मछली से लेकर मनुष्य तक कान जीववैज्ञानिक रूप से समान होता है सिर्फ उसकी संरचना गण और प्रजाति के अनुसार भिन्नता का प्रदर्शन करती है। कान वह अंग है जो ध्वनि का पता लगाता है, यह न केवल ध्वनि के लिए एक ग्राहक (रिसीवर) के रूप में कार्य करता है, अपितु शरीर के संतुलन और स्थिति के बोध में भी एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
अक्सर सड़कों पर कांच की बोतलों के टुकड़े, लोहे के टुकड़े, सुई आदि पड़े रहते हैं। किसी तरह की दुर्घटना होने के दौरान सड़क पर गिरने से ये वस्तुएं शरीर में घुस जाती हैं। सड़क पर नंगे पैर चलते समय इन चीजों के पैरों में घुस जाने की घटनाएं भी होती ही रहती हैं। हमारे कान की नस सीधे सीधे दिमाग की नसों से जुडी होती है,जिनमें किसी भी प्रकार की समस्या होने पर दिमाग पर असर पड़ता है। कान में कीड़ा जमीं पर सोने,बाहर घूमते समय और अन्य कारणों के कारण घुस जाता है। ऐसे में कुछ बातो का ध्यान रखना चाहिए और विशेष उपचार अपनाना चाहिए।
अगर कान के अंदर कीड़ा जिंदा है तो, आपको कान में सूर्य की रोशनी देनी चाहिए। जब कीड़े को बाहर गर्मी महसूस होती है तो कीड़ा तुरंत ही कान के बाहर आ जाता है।
अगर कान में चींटी चली गयी हो तो कान में अजीब सी सुरसराहठ होने लगती है तो ऐसे में फिटकरी को पानी में मिलाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें और थोड़ी देर के बाद वो पानी कान में डालने से चींटी बाहर आ जाती है।
कान में मौजूद कीड़े को बाहर निकालने के लिए किसी तरह की लकड़ी या फिर माचिस की दंडीकार चीजों को अंदर नहीं डालना चाहिए इससे कान के डैमेज होने का खतरा रहता है।

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