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श्री कृष्ण जब अपनी आखरी सांसे ले रहे थे राधा ने ऐसे दिया था उन्हें जीवनदान

श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार और हिन्दू धर्म के ईश्वर माने जाते हैं। कन्हैया, श्याम, गोपाल, केशव, द्वारकेश या द्वारकाधीश, वासुदेव आदि नामों से भी उनको जाना जाता हैं। कृष्ण निष्काम कर्मयोगी, एक आदर्श दार्शनिक, स्थितप्रज्ञ एवं दैवी संपदाओं से सुसज्ज महान पुरुष थे।
श्री कृष्ण तथा राधा के प्रेम से कोई अनजान नहीं है, उनकी जीवन से जुड़ी ऐसे अनेक प्रसंग है। जो हमें राधा कृष्ण के अटूट प्रेम की याद दिलाते हैं, उनमें से ही एक प्रसंग है चरण जल से जुड़ा हुआ है। इस पौराणिक कथा के अनुसार एक बार श्री कृष्ण बहुत बीमार हो गए किसी भी वेद की कोई दवा तथा जड़ी-बूटी उन पर कोई असर नहीं कर रही थी। तब श्री कृष्ण ने गोपियों से कहा कि एक उपाय है जिससे वह ठीक हो सकते हैं, श्री कृष्ण गोपियों से उन्हें चरण जल पिलाने को कहा यह उपाय सुनकर गोपियों दुविधा में पड़ गई।
श्री कृष्ण का मानना था कि यदि वह अपने परम भक्त जो कि इनसे बहुत प्रेम करते हैं, अगर श्री कृष्ण उनका चरण जल ग्रहण कर ले तो वह निश्चित ही ठीक हो जाएंगे। गोपियों के लिए श्रीकृष्ण बेहद महत्वपूर्ण थे, ये सभी उनसे दिल से प्रेम करती थी परंतु चरण जल पिलाने वाली बात सुनकर वह चिंता में पड़ गई। क्योंकि उन्हें इस उपाय के असफल होने की चिंता सता रही थी, गोपियों को भय था कि यदि उन्होंने अपने पांव धोने से बना हुआ जल श्रीकृष्ण को पिला दे, तो वह परम भक्त का कार्य कर देगी, परंतु यदि किसी कारण कान्हा जी ठीक ना हुए तो उन्हें नरक भोगना पड़ेगा।
यही सोचकर कोई भी गोपी आगे नहीं आ रही थी, तब राधा जी वहां आए तो श्रीकृष्ण जी को बीमार देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ। यह देखकर राधा जी की स्थिति ऐसी थी, कि मानो उनके प्राण ही निकल गए हो गोपियों ने राधा जी को श्री कृष्ण द्वारा सुझाव दिया गया चरण जल वाला उपाय बताया। उपाय सुनकर राधा जी ने समय बर्बाद किए बिना स्वयं के पांव धोकर तैयार कर दिया। गोपियों के मन में जो नर्क जाने का भय था, वह राधा जी के मन में भी था।
परंतु उनके लिए उस समय केवल श्रीकृष्ण का ठीक होना सबसे महत्वपूर्ण था, श्रीकृष्ण को ठीक करने के लिए वह नर्क जाने के लिए भी तैयार थी। श्री कृष्ण ने राधा जी द्वारा बनाया चरण जल ग्रहण किया और थोड़ी देर बाद वह स्वस्थ हो गए। क्योंकि राधा जी के प्रेम तथा भक्ति में सच्चे निष्ठा थी, उन्होंने श्रीकृष्ण को निरोग देखने के लिए अपने भविष्य की भी चिंता नहीं की।

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