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तनाव से मुक्त होकर सुख-चैन से जिंदगी जीनी है तो हमेशा याद रखें यह महत्वपूर्ण बातें

आज के समय में तनाव (stress) लोगों के लिए बहुत ही सामान्य अनुभव बन चुका है, जो कि अधिसंख्य दैहिक और मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रियाओं द्वारा व्यक्त होता है। तनाव की पारंपरिक परिभाषा दैहिक प्रतिक्रिया पर केंद्रित है। हैंस शैले ( Hans Selye) ने ‘तनाव’ (स्ट्रेस) शब्द को खोजा और इसकी परिभाषा शरीर की किसी भी आवश्यकता के आधार पर अनिश्चित प्रतिक्रिया के रूप में की। हैंस शैले की पारिभाषा का आधार दैहिक है और यह हारमोन्स की क्रियाओं को अधिक महत्व देती है, जो ऐड्रिनल और अन्य ग्रन्थियों द्वारा स्रवित होते हैं।
सुकून से रहना चाहते हो तो जीवन में किसी दूसरे की बातों से उदास मत होना,
मुसीबत और बुरा दिन पल भर के लिए आता है घबरा कर जीने का अंदाज मत खोना।
इस दुनिया की कड़वी सच्चाई है के सुख-दुख तो सदा जिंदगी में आते जाते रहते हैं,
मुश्किलें तो हमेशा सफलता का मार्ग खोलती हैं जिंदगी में एक हार से कभी निराश मत होना।
वक्त के दरमियां जब जेब में रुपए हो तो दुनिया आपकी अहमियत देखती है,
और जब जेब में रूपये ना हो तो उस बुरे वक्त में दुनिया अपनी औकात दिखाती है
फर्क सिर्फ सोच का है क्योंकि जो सीधा ऊपर जाती है वह नीचे भी लेकर आती हैं।
दुनिया में इंसान का कोई महत्व नहीं है इज्जत हमेशा उसकी इंसानियत की होती है।
इंसान की सोच समझ के आधार पर मन के जिस दरवाजे से शक अंदर जाता है,
जिंदगी में फिर प्यार और विश्वास उसी शक के दरवाजे से बाहर निकल जाता है।
दुनिया में हर इंसान का असली रूप तब दिखाई देता है जब वह किसी नशे में होता है,
फिर वह नशा चाहे उसके रुतबे का हो,चाहे शोहरत का हो या फिर चाहे औरत का हो।

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