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लगातार बारिश ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान में जुटे सुरक्षाबलों की चुनौतियां बढ़ा दी

लगातार बारिश ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान में जुटे सुरक्षाबलों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। घने जंगल और पहाड़ी नालों में पानी के बहाव से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इन मुसीबतों के साथ विषैले सांप-बिछुओं का भी आतंक इस मौसम में बढ़ जाता है। तमाम मुश्किलों के बावजूद सुरक्षाबल बिहार-झारखंड की सीमा पर घने जंगलों में अभियान को अंजाम देने में जुटे हैं।
बिहार के घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बरसात में सुरक्षाबलों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। झारखंड से लगते बिहार के कई जिले भौगोलिक रूप से कठिन हैं। इसी का फायदा उठाते हए नक्सलियों ने जंगल और पहाड़ के बीच अपना ठिकाना बना रखा है। वैसे तो सालों भर इन इलाकों में सुरक्षाबलों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है पर बरसात का मौसम इसे और भी मुश्किल बना देता है।
लगातार बारिश होने की वजह से पेड़-पौधे हरे भरे हो जाते हैं। जंगल के घने होने से दूर तक नहीं दिखाई देता है। इससे सुरक्षाबलों को काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। बरसाती नाले भी पानी से लबालब होते हैं, जिससे उसे पार करना आम दिनों की अपेक्षा बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
बिहार में मानसून को आए दो महीने बीत गए हैं। कई इलाकों में बारिश भी अच्छी खासी हुई है। नक्सल विरोधी अभियान से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक जंगल और पहाड़ी इलाकों में बारिश की वजह से सुरक्षाबलों को कई दिक्कतें आ रही है। बावजूद इसके अभियान को जारी रखा गया है।
फिसलन भी बड़ी समस्या
बरसात के मौसम में एक तो नालों में पानी का बहाव काफी तेज होता है, दूसरे बारिश के चलते चट्टानों पर फिसलन का खतरा हमेशा बना रहता है। इससे उबड़-खाबड़ रास्ते पर सुरक्षाबलों को काफी संभलकर आगे बढ़ना होता है। जवान इसके लिए अभ्यस्त हो चुके हैं पर फिसलन की वजह से उन्हें बहुत सावधानी बरतनी पड़ रही है।
अभियान के लिहाज से यह मौसम भले ही अनुकूल न हो पर सुरक्षाबलों का एंटी नक्सल ऑपरेशन लगातार जारी है। खासकर गया, औरंगाबाद, नवादा, लखीसराय, जमुई और मुंगेर के जंगल के इलाके जो भगौलिक रूप से कठिन हैं वहां भी अभियान जारी है। तमाम दिक्कतों के बावजूद जवानों के हौसले बुलंद हैं और नक्सलियों के मंसूबे को लगातार धराशायी करने में उन्हें कामयाबी मिल रही है।

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