लकवा एक बहुत ही गंभीर बीमारी जिस व्यक्ति को लकवा मार जाता है। उसका आधा शरीर या फिर कभी आधा सिर या फिर नीचे का शरीर या फिर ऊपर का शरीर इस तरीके से शरीर के भाग अचानक काम करना बंद कर देते हैं। जिससे व्यक्ति पूरी तरह से असमर्थ हो जाता है। जिससे वह अपने उस भाग को हिला दुला भी नहीं पाता  है। 
इसका मुख्य कारण उस भाग में खून का संचरण ठीक से नहीं हो पाता। जिससे नसे  नहीं काम करते है और इंसान उस भाग को हिलाने डुलाने में भी असमर्थ हो जाता है।  
लकवा मुख्य रूप से आज के समय के खानपान के कारण ज्यादा होता है। इसलिए ज्यादातर बाहर की चीजों को इस्तेमाल न करें। जिससे इस रोग से बचा जा सके। लकवा को फालिज के नाम से भी जानते हैं। अंग्रेजी में जिसे पैरालिसिस भी कहते हैं।

लकवा का उपचार

पैरालिसिस अगर गंभीर रूप से मार गया है तो मरीज को तत्काल किसी न्यूरो सर्जन को दिखाना चाहिए। जिससे उसकी समस्या का पता चल सके और उसका सही समय पर इलाज मिल सके। 
इसके अलावा प्राथमिक उपचार के रूप में 10 गांव ग्राम उड़द की दाल, 10 ग्राम देसी घी, 10 ग्राम गुड़ और 10 ग्राम सोंठ को लेना चाहिए। इसके बाद सबसे पहले उड़द की दाल को अच्छी तरह से कूट पीस कर देसी घी में भून लें और फिर गुड और सोंठ को अच्छी तरह पीसकर उसमें मिला लें। 
इस औषधि को पैरालिसिस के रोगियों को दिन में तीन से चार बार खिलाने से पैरालिसिस की समस्या में बहुत अकल्पनीय लाभ मिलता है।
नोट-उपरोक्त नुस्खे को उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श एक बार अवश्य कर लें।
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