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यह सुरक्षा प्रणाली लागू होने से ट्रेनों के होने वाले हादसों में आएगी कमी, बढ़ेगी रफ्तार

ट्रेन के चालक को एक स्टेशन से पहले ही अगले स्टेशन के सिग्नल के लाल या हरी होने की जानकारी मिल जाएगी, सिग्नल लाल होने पर चालक भूलवश ट्रेन नहीं रोकता है तो सिस्टम इंजन का पहिया जाम कर देगा। देश भर में स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 37 हजार किलोमीटर में लगाने की योजना है। मुरादाबाद रेल मंडल के सहारनपुर से लखनऊ तक इस सिस्टम को लगाने का प्रस्ताव भेजा गया है।विश्व के कई विकसित देशों में ट्रेनों को आधुनिक तकनीक से संचालित किया जाता है। इससे चालकों को सिग्नल देखने की आवश्यकता नहीं होती है, इंजन में लगे सिस्टम पर सिग्नल की जानकारी मिलती है। कई देशों में कोहरे के बाद भी ट्रेनों को तेज गति से चलाया जाता है। साथ ही सिस्टम आमने सामने ट्रेन दुर्घटना को भी रोकता है।आत्मनिर्भर भारत के तहत कई देश की कंपनियों ने स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली उपकरण तैयार किए हैं। रेलवे की जांच में यह सिस्टम खरा उतरा है। प्रथम चरण में भारतीय रेलवे के 37 हजार किलोमीटर प्रमुख रेल मार्ग पर यह सिस्टम लगाने की योजना तैयार की गई है। इस पर रेलवे के 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस सिस्टम को आप्टिकल फाइबर केबिल द्वारा प्रस्तावित मार्ग से सभी स्टेशनों के सिग्नल सिस्टम को आपस में जोड़ा जाएगा, जो इंटरनेट व मोबाइल नेटवर्क द्वारा संचालित होगा।स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का उपकरण ट्रेन के इंजन में लगाया जाएगा। यह सिस्टम इंजन और ब्रेक सिस्टम से जुड़ा होगा। स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली लग जाने के बाद ट्रेन के चालक को अगले स्टेशन पर सिग्नल की क्या स्थिति है, यह पता चल जाएगा। कम ठहराव वाले ट्रेन चालकों को ट्रेन चलाने में आसानी होगी। अगले स्टेशन पर ट्रेन के रोकने के लिए सिग्नल लाल है और चालक भूलवश ट्रेन रोकने के लिए प्रयास नहीं करता है तो सिस्टम में इंजन को बंद कर देगा और ब्रेक लगा देगा। इस सिस्टम के लग जाने के बाद ट्रेनों को तेज गति से चलाया जा सकता है।जम्मूतवी हावड़ा रेल मार्ग मुरादाबाद मंडल से होकर गुजरती है। इस मार्ग पर सहारनपुर से लखनऊ तक साढ़े पांच सौ किलोमीटर रेल मार्ग पर स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली लगाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। इस योजना को पूरा होने में पांच साल का समय लग जाएगा। इस सिस्टम द्वारा ट्रेनों की निगरानी भी की जा सकती है।

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