बैगन एक महत्वपूर्ण सब्जी है। जिसे लगभग हर व्यक्ति इस्तेमाल करता है। अगर बैंगन की खेती अगेती की जाए तो इससे भारी संख्या में लाभ होता है। भारत में बैंगन की खेती लगभग 50 से 60 हजार हेक्टेयर में की जाती है। इसमें काफी मात्रा में न्यूट्रिएंट्स पाये जाते हैं। जो हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। 
इसके बाद इसका प्रयोग आयुर्वेदिक दवाएं में भी किया जाता है। इसमें प्रोटीन, बसा, मिनिरल, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, कैलोरीज, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, आयरन, सोडियम, पोटैशियम ,कॉपर, सल्फर, क्लोरीन। विटामिन ए, थाइमीन, राइबोफ्लेविन, निकोटीनिक एसिड और विटामिन सी जैसे बहुत महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं। सेहत के लिए भी बैंगन बहुत ही अच्छा होता है। 

बैंगन की खेती करने के लिए की महत्वपूर्ण प्रजातियां

बैगन की प्रजातियों का चुनाव बहुत ही सावधानी से करना चाहिए। क्योंकि प्रजातियों के आधार पर ही इसका उत्पादन अच्छा होता है। आज मैं कुछ प्रजातियां बता रहा हूं। जो काफी महत्वपूर्ण हैं। 
इनमें से पूसा पर्पल लांग, पूसा पर्पल राउंड, पूसा पर्पल क्लस्टर, उषा क्रांति, उषा भैरव,  और पूसा अनुपम महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं। अगर उत्तर प्रदेश में बैंगन की खेती करना चाहते हैं तो उसके लिए महत्वपूर्ण प्रजाति हैं ब्लैक ब्यूटी, बनारस कैंट, टी 1 से टी 4 , पंत सम्राट और आजाद क्रांति जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं। 
बैगन की खेती के लिए मुख्य रूप से 13 डिग्री सेंटीग्रेड से 21 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की आवश्यकता होती है। अगर बैंगन की खेती अच्छी तरीके से करना चाहते हैं तो इसके लिए सिल्ट लोम या फिर क्ले भूमि सबसे ज्यादा उत्तम मानी जाती है। बैगन की खेती करने के लिए बैगन के बीजों को 6 से 12 मिली मीटर गहरा भूमि में दबाते हैं। 
बरसात के मौसम में बैंगन की खेती मार्च से अप्रैल में वह की जाती है। अगर स्प्रिंग सीजन में बैंगन की खेती करना चाहते हैं तो इसकी नर्सरी नवंबर में बोई जाती है और जनवरी माह में इसको खेत में बुबाई कर दिया जाता है।
 बैगन की खेती के लिए 370 से 500 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। यह मात्रा एक हेक्टेयर बैंगन की खेती करने के लिए उपयुक्त होती है। बीज शोधन के लिए 24d का इस्तेमाल करते हैं। बैंगन के फलों को उस समय तोड़ना चाहिए जब इनकी साइज अच्छी हो जाए और कलर भी अच्छा दिखाई देने लगे।
 उस समय बैंगन के फलों को तोड़ना चाहिए। मुख्य रूप से एक हेक्टेयर में 300 से 400 कुंटल बैंगन का उत्पादन होता है। इसके बाद बैंगन की छटाई करनी चाहिए। जिसमें छोटे, मीडियम और बड़े बैंगन को अलग करना चाहिए। जिससे बैंगन का बाजार में मूल्य अच्छा मिलता है। 
अगर बैंगन का स्टोरेज करना चाहते हैं तो इसे 10 से 13 डिग्री सेंटीग्रेड पर स्टोर कर सकते हैं। बैंगन में मुख्य रूप से डंपिंग ऑफ नामक बीमारी लगती है। जिसके लिए बीज शोधन जिम्मेदार होता है। इसलिए बुवाई से पहले बैंगन के बीजों का शोधन अवश्य कर लेना चाहिए। इस तरीके से अगर बैंगन का उत्पादन करेंगे तो अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। बैगन का यह  बिजनेस बहुत ही कारगर है। जिसे करने से काफी लाभ मिलता है।
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