बवासीर बहुत ही खतरनाक बीमारी होती है। इसके हो जाने से व्यक्ति को असहनीय पीड़ा से गुजरना पड़ता है। जिससे व्यक्ति के अंदर काफी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। वह चिड़चिड़ा और कमजोर हो जाता है। यह बीमारी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं-

1-वादी बवासीर- इस तरह की बवासीर हो जाने पर व्यक्ति को शौच करते समय असहनीय पीड़ा होती है। यहां तक कभी-कभी व्यक्ति इतने ज्यादा पीड़ित हो जाता है कि वह तरह-तरह की दवाइयों का इस्तेमाल भी करने लगता है। जिससे यह बीमारी और भी ज्यादा गंभीर होने की संभावना हो जाती है।

2-खूनी बवासीर- इस तरह की बीमारी बहुत ही खतरनाक होती है। शौच करते समय इस तरह की बीमारी में असहनीय पीड़ा के साथ-साथ काफी ब्लड भी मल के द्वारा निकल जाता है। जिससे व्यक्ति बहुत ही कमजोर हो जाता है। इस बवासीर के लगातार रहने से व्यक्ति की हालत बहुत ही ज्यादा खराब हो जाती है। यहां तक कभी-कभी व्यक्ति आत्महत्या तक करने को सोचने लगता है। यह मेरा देखा हुआ अनुभव है।

बवासीर का उपचार

मुख्यतः इस बीमारी में गुदा द्वार में दाने निकल आते हैं और जब व्यक्ति मल त्यागने जाता है तो उस समय मलके निकलते समय वह दाने फूट जाते हैं और खून निकलने लगता है। जिसके कारण असहनीय दर्द होता है। इस बीमारी को ठीक करने के लिए आज मैं एक साधारण सा उपचार बताने जा रहा हूं। जिसका उपयोग करने से बवासीर में काफी लाभ मिलता है।

इस बीमारी के उपचार के लिए सबसे पहले एक आम की गुठली तलासनी है। जो अंकुरित हो चुकी हो। आम भाषा में जिसे पपीहा भी कहा जाता है। उस गुठली को निकाल लें और उसमें से पत्तियों और जड़ों को निकाल कर फेंक दें। इसके बाद उसमें चिर -चिरा जिसे लटजीरा भी कहा जाता है, की पांच पतियों को लेकर उसके अंदर बीचो बीच में दवा लें और उसके बाद सुबह खाली पेट इसी तरह से लगातार पांच दिन सेवन करें।

ऐसा माना जाता है कि इस तरह से 5 दिन सेवन करने से सभी तरह की बवासीर खत्म हो जाती है और व्यक्ति आरोग्य हो जाता है। यह उपचार बहुत ही साधारण और आसानी से हर जगह भारत में मिल जाता है। इसलिए इसका उपयोग हर आम आदमी कर सकता है।

नोट-इस औषधि का उपयोग करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर या हकीम से परामर्श अवश्य ले लें।

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