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दुष्ट मित्र की पहचान कैसे करे आचार्य चाणक्य द्वारा बताए गए, आइए जाने

चाणक्य (अनुमानतः ईसापूर्व 375 – ईसापूर्व 283) चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। वे ‘कौटिल्य’ नाम से भी विख्यात हैं। वे तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य थे।[1] उन्होने नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया। उनके द्वारा रचित अर्थशास्त्र राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का महान ग्रंन्थ है। अर्थशास्त्र मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता है।
आचार्य चाणक्य कहते है,
1) जो व्यक्ति आपके सामने आपकी तारीफ करता हो, और बाहर दूसरे लोगो से आप की बुराई करता हो या आपको बर्बाद करने की साज़िश करता हो, तो वैसे मित्र से दूर रहने में ही भलाई है।
2) जो व्यक्ति बिना कार्य के यहाँ हमेशा घूमता हो, और बहुत से प्रकार के मादक पदार्थो का सेवन करता हो वैसे मनुष्य का बहिष्कार कर देना चाहिए।
3) यदि घर मे कोई नौकर आपसे उच्चे स्वर में बोलता हो, और आपका कोई आदर ना करता हो तो उसे फौरन घर से बाहर निकाल देना चाहिए।
4) जो व्यक्ति हमेशा यहां वहां की चुगली करता हो और हर समय कोई ना कोई आपके लिए षड़यंत्र रचता हो तो वैसे व्यक्ति का साथ छोड़ देना चाहिए।

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