अवसाद जिसे इंग्लिश में एंग्जायटी भी कहते हैं। यह समस्या वर्तमान समय में बहुत ही तेजी से बढ़ रही है। जो युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को बहुत ही ज्यादा प्रभावित करती हैं। अवसाद में आ जाने पर व्यक्ति एकदम सुनसान जगह तलाशता है किसी से बात नहीं करता है। ऐसा देखने पर उस व्यक्ति की सबसे पहले मदद करनी चाहिए जिससे उसके अवसाद को कम किया जा सके। अन्यथा जब व्यक्ति पूरी तरह से अवसाद में चला जाता है तब वह आत्महत्या भी कर सकता है। इसलिए ऐसे व्यक्ति को प्यार से संभालना चाहिए उससे लड़ना नहीं चाहिए यहां तक उसकी बातों का बुरा भी नहीं मानना चाहिए।

अवसाद के लक्षण

अवसाद में व्यक्ति को उलझन और घबराहट जैसी महसूस होती है। उसके बाद उसके अंदर छटपटाहट जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है। इतना ही नहीं व्यक्ति की हृदय की गति भी बढ़ जाती है और पसीना छूट जाता है। जिससे व्यक्ति को सांस लेने में बहुत ही ज्यादा समस्या होने लगती है और ऐसा लगता है कि उसका ह्रदय जल्द ही काम करना बंद कर देगा। ऐसे में व्यक्ति बहुत ही ज्यादा परेशान हो जाता है और छटपटाने लगता है।

अवसाद का उपचार

अवसाद से ग्रसित व्यक्ति को सबसे पहले अपने दिमाग के ऊपर हो रही समस्याओं से हटाना पड़ता है। अगर ऐसा व्यक्ति ज्यादा सोचता रहता है तो उसे और भी समस्याएं होने लगती हैं। अवसाद ग्रसित व्यक्ति को जैसे ही पता चले कि उसे अवसाद ने घेर लिया है तो तुरंत ही उसको चहल कदमी शुरू कर देनी चाहिए। लंबी-लंबी सांसे लेना शुरू कर देना चाहिए ताकि सांसो का पैटर्न तोड़ा जा सके। ऐसे में साँसों का पैटर्न तोड़ना जरूरी होता है। क्योंकि अवसाद में ऐसा लगता है कि उसकी सांसे थमने से लगी हैं।

व्यक्ति को हृदय गति कम करने के लिए सर्वप्रथम अपने अंगूठे पर हाथ रखकर कहना चाहिए की मुझे किस समस्या ने घेर रखा है। यह कहने से उसका ध्यान सीखने की तरफ आकर्षित हो जाता है। इसके बाद दूसरी उंगली पर हाथ रखकर कहना चाहिए कि इस समस्या का समाधान क्या है। तीसरी उंगली पर हाथ रख कर उन चीजों को याद करना चाहिए जिससे अवसाद में लाभ मिलता है। इसके बाद अंतिम उंगली पर हाथ रख कर कहना चाहिए कि अवसाद से ग्रसित व्यक्ति को किन-किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए जैसे ठंडा पानी ओस में सोना इत्यादि।

यह सब करने के बाद व्यक्ति को कुछ प्राणायाम करने चाहिए। एक प्राणायाम मैं यहां पर बताने जा रहा हूं जो अवसाद में बहुत ही कारगर है। इसके लिए अपने हाथों को सबसे पहले आगे से कंधे पर रखकर इसके बाद तेजी से हाथों को ऊपर उठाएं और अंदर की तरफ सांस लें। इसके बाद हाथों को पुनः उसी स्थिति में रख दें और सांस को छोड़ दें। यह प्रक्रिया लगातार 5 से 8 बार करने से तुरंत लाभ मिलना शुरू हो जाता है।

इसके अलावा दूसरा आसन अवसाद की स्थिति में बहुत ही लाभदायक है। अपने दोनों पैरों को फैला लें। इसके बाद एक पैर को खींच कर दूसरे पैर के कोने में रख ले और जो पैर फैला हुआ है उस पेअर की तरफ जितना भी झुक सके झुके और झुकते समय अंदर की तरफ तेजी से सांस खींचें। इसके बाद दूसरा पैर खोल दें और पहले पैर को पुनः खींचकर जो पैर खोला है उसके कोने में रख ले। इसके बाद उसे दूसरे पैर के तरफ जितना भी झुक पाएं झुके और गहरी से सांस अंदर खींचें और ऊपर उठ जाएं। इस प्रक्रिया को 5 से 8 बार करने से तुरंत लाभ मिलता है।

इसके अलावा अनुलोम विलोम और भ्रमरी भी करने से काफी लाभ मिलता है। अगर इसके बाद भी आपकी समस्या नहीं रूकती है और लाभ नहीं मिलता है तो तत्काल ही किसी मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिए।

नोट-उपरोक्त में से किसी भी उपाय को करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य ले लें।

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